संस, गावां, संदीप बरनवाल: कोरोना से मौत होगी या नहीं ये तो नहीं पता पर लगता है कि अब भूखे पेट मर जाएंगे। यह पीड़ा है प्रखंड के गावां, खरसान, डेवटन, पत्थलडीहा, नीमाडीह समेत तिसरी, देवरी व गिरिडीह के विकास राम, राजेश राम, पिटू कुमार, बिपिन कुमार, महेंद्र राय, संजय राय, मुंशी यादव, घनश्याम यादव, टेकन यादव, कामेश्वर यादव, पप्पू यादव, रोबिन यादव, मो. मुर्तजा आदि मजदूरों की जो सूरत, केरल, चेन्नई में कोरोना वायरस को ले काम बंद होने से बुरी तरह फंस गए हैं। उनलोगों ने दैनिक जागरण संवाददाता से अपनी पीड़ा साझा करते हुए कहा है कि वे लोग काम बंद होने के कारण भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं। स्थानीय पुलिस घर से बाहर निकलने पर डंडा मारती है। उनके पास खाने को बस दो तीन दिन का ही पैसा बचा हुआ है। अगर घर आने का कोई उपाय नहीं हुआ तो वे लोग कोरोना से तो बाद में मरेंगे, पहले भूखे प्यासे ही उनकी मौत हो जाएगी। चेन्नई में फंसे पत्थलडीहा निवासी सुमन शर्मा, पकंज शर्मा, राजेश शर्मा, डेवटन निवासी राममिलन शर्मा, प्रकाश शर्मा व रंजीत शर्मा ने बताया कि वे लोग चेन्नई में फंसे हुए हैं। गावां निवासी विकास राम, राजेश राम, पिटू कुमार आदि ने बताया कि उनकी बिल्डिग सूरत में 50 से अधिक गिरिडीह के देवरी, गावां व तिसरी के युवक हैं जो कपड़ा मिल में दिहाड़ी मजदूर का काम करते थे। अगर उनकी मदद नहीं की गई तो वे लोग भूखे मर जाएंगे। उनलोगों ने सोशल मीडिया के जरिए वीडियो जारी कर झारखंड सरकार से न्याय की गुहार लगाई है।

Posted By: Jagran

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