संवाद सहयोगी, गांडेय (गिरिडीह) : गांडेय प्रखंड के दासडीह गांव में 32 वर्षों से चैत्र नवरात्र धूमधाम से मनाया जा रहा है। मंदिर में प्रतिमा स्थापित कर नौ दिनों तक विधि विधान से माता की आराधना की जाती है। पूजा में दासडीह समेत आसपास के गांवों के लोग जुटते हैं। दासडीह का मंदिर आसपास के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है।

पूर्व मुखिया ने 1990 में शुरू की थी पूजा : यजमान आजाद प्रसाद वर्मा ने बताया कि उसके पिता पूर्व मुखिया स्व. योगेश्वर महतो माता के अनन्य भक्त थे। वे माता रानी के बड़े उपासक थे। वे अपने घर में पूरे परिवार के साथ माता की विधि विधान से आराधना करते थे। उन्होंने प्रतिमा स्थापित कर नवरात्र करने की ठानी। उन्होंने अपनी लागत से वर्ष 1990 में घर के समीप माता का भव्य मंदिर बनाया। पुन: बंगाल से मूर्तिकार को बुलाकर माता की प्रतिमा तैयार करवाई। प्रतिमा स्थापित कर पूरे परिवार के साथ विधि विधान से माता की आराधना शुरू की। माता की ख्याति देखकर बाद में आसपास के गांवों के लोग भी पूजा में शामिल होने लगे। तब से लेकर आज तक प्रत्येक वर्ष माता की आराधना की जा रही है। प्रत्येक वर्ष बंगाल के मूर्तिकार होली के बाद से ही मूर्ति बनाना शुरू कर देते हैं जिसे नवरात्र तक पूर्ण करते हैं। पूर्व मुखिया के गुजरने के बाद वर्तमान में उनके पुत्र आजाद प्रसाद वर्मा पिता की परंपरा का निर्वहन कर रहे हैं। कलश स्थापित कर नौ दिनों तक माता की होती है आराधना : मुख्य पुरोहित पंडित सरस सुमन लाल शास्त्री ने बताया कि वासंती नवरात्र के प्रथम दिन से चंडी पाठ कर माता की आराधना शुरू की जाती है। प्रतिदिन पाठ व संध्या में आरती होती है। सप्तमी में कलश स्थापन कर विधिवत पूजा होती है। साथ ही माता की प्रतिमा का पट भक्तों के दर्शन के लिए खुलता है। पट खुलते ही दासडीह, गांडेय, मोहनडीह, लोहारी समेत आसपास के गांवों के श्रद्धालु जुटते हैं। वहीं नौ दिनों की आराधना के बाद पूजा का समापन किया जाता है। माता की आराधना कर शांति व तरक्की की कामना की जाती है। कोरोना के कारण नहीं लगेगा मेला : नवरात्र में दशमी के दिन भव्य मेला का आयोजन किया जाता था। बीते दो वर्षों से कोरोना महामारी का संक्रमण बढ़ने के कारण प्रोटोकॉल का पालन करते हुए पूजा की जाती है। कमेटी की ओर से मेला के आयोजन पर रोक लगा दी गई है। पूजा के सफल आयोजन में दासडीह के लोग जुटे हैं।

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