श्रीप्रसाद वर्णवाल/सोहन कुमार,

बगोदर : जहां एक और सरकार कच्चे मकान में रह रहे गरीबों को पक्का मकान दे रही है, दूसरी ओर कोलकाता से दिल्ली जीटी रोड चौड़ीकरण के कारण बगोदर के औंरा में एक गरीब परिवार को बेघर कर दिया गया। गरीब परिवार के पास न रहने के लिए घर है और न ही घर बनाने के लिए जमीन।

सात सदस्यीय परिवार में एक मात्र कमाऊ व्यक्ति है जो बगोदर के एक छोटे से होटल में मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करता है। हम बात कर रहे हैं बगोदर के औंरा की दिव्यांग मीना देवी व उसके पति गणेश गुप्ता की। मीना न बढि़या से चल पाती है और न ही बोल पाती है। एनएचएआइ ने चौड़ीकरण में मकान सहित भूमि का अधिग्रहण कर बिना मुआवजा दिए तोड़ दिया है। इससे यह गरीब परिवार बेघर हो गया है।

उसका मकान एनएचएआइ ने गत 24 जून को तोड़ कर अधिग्रहित कर लिया है। इसके बाद से पूरा परिवार भगीरथ मंडल के टूटे मकान मे चार दिन से रह रहा था। उस टूटे मकान में दरवाजा भी नहीं था। मंगलवार को उक्त परिवार टूटे मकान से पंचायत सचिवालय में रहने के लिए पूरा सामान टेम्पु से ले जा रहा था। दैनिक जागरण की टीम उस परिवार की सुध लेने पहुंची। मीना देवी के पुत्र राजकुमार गुप्ता व पुत्री राखी कुमारी ने अपना दुखड़ा सुनाते हुए कहा कि मकान तोड़ने आए अधिकारियों की जी हुजूरी करते रहे, लेकिन अधिकारियों ने तनिक भी नहीं सुनी और बिना मुआवजा दिए मकान तोड़ दिया। मुआवजा मिलता तो कहीं पर भाड़े के रूम लेकर रहते। मां पूरी तरह शारीरिक रूप से दिव्यांग है। वह न बढि़या से खड़ी हो पाती है और न अच्छी तरह से बोल पाती है। बिना मुआवजे के मकान तोड़ने के बाद पिछले चार दिनों से दूसरे के एक टूटा हुआ बिना दरवाजा के मकान मे रह रहे थे। आज गांवोंवालों व स्थानीय मुखिया के सहयोग पंचायत सचिवालय में रहने के लिए अस्थायी रूप से शरण मिला है। हमलोगों सात परिवार है।और पिताजी हेसला के एक होटल मे मजदूर करते हैं। जिससे हमलोगों का परिवार चलता है।

जीटी रोड चौड़ीकरण में बगैर मुआवजा दिए कई घरों को तोड़कर जमीन अधिग्रहित कर लिया गया है। इसके कारण औंरा के परिवार भाड़े के रूम में रह रहे हैं। भाडे़ के रूम रह रहे परिवार में अजय चौरसिया, महेन्द्र गुप्ता, सहदेव गुप्ता आदि शामिल हैं।

Posted By: Jagran

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