गिरिडीह : कोरोना वायरस के सेंट्रल जेल गिरिडीह की सलाखों के पीछे तक पहुंचने का खतरा मंडराने लगा है। इस खतरे को देख यहां बंद हार्डकोर माओवादी व अपराधी भी दहशत में हैं। अधिक संख्या होने के कारण जेल के अंदर बंदी कैची कट सो रहे हैं। ऐसे में संक्रमण का खतरा से कोई इन्कार नही कर सकता है। वहीं वायरस संक्रमण को लेकर सेंट्रल जेल प्रशासन कितना गंभीर है यह आंकड़ा देखने से पता चलता है।

यहां करीब छह सौ बंदियों को रखने की क्षमता है। वर्तमान में 808 बंदी हैं। कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए प्रधानमंत्री ने एक मीटर का सोशल डिस्टेंस बनाकर रहने का आह्वान किया है। इसका रत्ती भर पालन जेल में नहीं हो पा रहा है।

जेल परिसर में कुल 18 वार्ड हैं। एक अस्पताल भी है। इन 19 वार्डो और अस्पताल में आठ सौ से अधिक बंदी जीवन गुजार रहे हैं।

जिले के विभिन्न थाना क्षेत्र से प्रतिदिन बंदियों को लाया जा रहा है। बंदियों को एक वार्ड में 40 से अधिक की संख्या में रखा जाता है। हालांकि जेल प्रशासन संक्रमण से बचने के लिए बंदियों को सैनिटाइजर और मास्क दे रहा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर चार दिन पूर्व जेल में विशेष अदालत लगाकर 19 बंदियों को रिहा भी किया गया है। इसके बावजूद अभी 208 अधिक बंदी हैं।

-बिना अधीक्षक व जेलर के चल रहा सेंट्रल जेल : 17 जनवरी 2018 को गिरिडीह जेल को सेंट्रल जेल बनाया गया था। करीब डेढ़ साल से अधिक समय से यह सेंट्रल जेल बिना अधीक्षक एवं जेलर के चल रहा है। 31अक्टूबर 2018 से जेल अधीक्षक का काम यहां प्रभार पर चल रहा है। फिलहाल कार्यपालक दंडाधिकारी धीरेंद्र कुमार यहां जेल अधीक्षक के प्रभार में हैं जबकि सेंट्रल जेल के अधीक्षक का पद एडीएम स्तर के अधिकारी का है। एक जेलर व दो सहायक जेलर का पद यहां स्वीकृत है जबकि यहां मात्र एक सहायक जेलर कोलेश्वर पासवान हैं। इस जेल में एक स्थायी डॉक्टर भी नहीं हैं।

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कोरोना वायरस के संक्रमण रोकने के लिए कदम उठाए गए हैं। जेल अदालत में भी कुछ बंदियों को छोड़ा गया है। इसके बावजूद क्षमता से अधिक यहां बंदी हैं। कुछ बंदियों को दूसरे जेलों में शिफ्ट किया जाएगा। मुलाकातियों पर रोक लगा दी गई है।

धीरेंद्र कुमार, प्रभारी जेल अधीक्षक, गिरिडीह

Posted By: Jagran

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