पीरटांड़ (गिरिडीह) : पारसनाथ पहाड़ एवं उसकी तलहटी में बसा मधुबन जैन धर्मावलंबियों का सबसे पवित्र तीर्थस्थल है। देशभर से तीर्थयात्रियों का यहा सालभर आना जाना रहता है। पूरा विश्व महामारी कोरोना वायरस से जूझ रहा है। हर ओर चिकित्सा सुविधा दुरुस्त की जा रही है। बावजूद मधुबन में इलाज का कोई प्रबंध नहीं है। बाहर से आने वाले यात्रियों की चिकित्सकीय जाच नहीं हो रही है। यह खतरनाक भी हो सकता है।

मधुबन की स्वास्थ्य व्यवस्था एक निजी संस्था के हाथों सौंपी गई है। जिसकी ओर से डुमरी के एक चिकित्सक को दो दिन यहां बैठाकर मरीजों का इलाज कराया जाता है। मधुबन की जैन संस्थाओं की मांग पर यहां स्थित अर्बन हाट में स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्वास्थ्य केंद्र भी खोला गया है। जिसमें चार चार बेड भी लगाए गए हैं पर चिकित्सक के अभाव में यहां रोगियों को केवल रेफर किया जाता है। अस्पताल की हालत देखकर नहीं लगता है कि यहां भी कोई इलाज कराने पहुंचता होगा। बहरहाल बुधवार दोपहर करीब दो बजे जागरण टीम मधुबन स्वास्थ्य उपकेंद्र पहुंची तो यहां दो महिला व एक बच्ची मिली। परिचय देने के बाद भी रजिस्टर उलटती हुई दिखाई दी। कुछ सवाल करने पर बताया गया कि अस्पताल कार्यालय समीप के तहसील भवन में है, वहां के लोगों से मिल लीजिए। इस दौरान दोनों महिलाओं ने अपना नाम तक नहीं बताया। बाहर जाने पर दीपक फाउंडेशन के कार्यालय का कमरा बंद मिला। बाद में फोन से संपर्क करने पर इसके प्रभारी ने कार्यालय के बाहर बुलाकर बताया कि यहां प्रतिदिन काफी मरीजों का इलाज होता है। मधुबन में कोरोना वायरस मामले को ले चर्चा खूब जोर दिखी। पारसनाथ पहाड़ से उतर रहे कुछ जैन यात्रियों को तो मास्क लगाए देखा गया। कुछ लोगों ने बताया कि फिलहाल मधुबन में सब ठीक ठाक है। डोली मजदूरों ने बताया कि मधुबन में इलाज के लिए पूरी व्यवस्था नहीं है।

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वर्जन

यहां प्रतिदिन चालीस मरीजों का इलाज होता है। औसतन एक माह में एक हजार से अधिक लोगों को इलाज किया जाता है।

अभय सहाय, दीपक फाउंडेशन संस्था के प्रभारी

Posted By: Jagran

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