गढ़वा में पलामू टाइगर रिजर्व से सटे रमकंडा-भंडरिया जंगलों में बाघ की दस्तक, वन विभाग ने जारी किया अलर्ट
बाघ के पगमार्क और शिकार के प्रमाण मिलने के बाद गढ़वा जिले के रमकंडा और भंडरिया वन क्षेत्र में उसकी ...और पढ़ें

गढ़वा के जंगलों में पाया गया बाघ के पंजे के निशान। (चित्र: सौजन्य वन विभाग)
HighLights
गढ़वा के रमकंडा-भंडरिया वन क्षेत्र में बाघ की पुष्टि।
बाघ के पगमार्क और मवेशियों के शिकार के प्रमाण मिले।
वन विभाग ने हाई अलर्ट जारी कर निगरानी बढ़ाई।
नितेश तिवारी, रमकंडा (गढ़वा)। पलामू टाइगर रिजर्व (पीटीआर) से सटे गढ़वा जिले के रमकंडा और भंडरिया वन क्षेत्र के जंगलों में बाघ की दस्तक से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। बाघ के पंजों के निशान (पगमार्क) और उसके द्वारा किए गए शिकार के प्रमाण मिलने के बाद वन विभाग ने फिलहाल उसकी मौजूदगी की पुष्टि की है।
बाघ की गतिविधियों को देखते हुए पीटीआर समेत आसपास के वन क्षेत्रों में हाई अलर्ट जारी किया गया है। संभावित मूवमेंट वाले इलाकों में कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं। वन विभाग की टीमें लगातार निगरानी और सर्च अभियान चला रही हैं।
पगमार्क और शिकार से हुई पहचान
वन विभाग के अनुसार, बाघ के पगमार्क और उसके शिकार के प्रमाण के आधार पर उसकी पहचान की गई है। हालांकि, अब तक बाघ की तस्वीर कैमरा ट्रैप में कैद नहीं हुई है। जिन इलाकों में उसके मूवमेंट के प्रमाण मिले हैं, वहां निगरानी बढ़ा दी गई है और अतिरिक्त कैमरे लगाए जा रहे हैं।
बताया गया कि हाल ही में रंका के ढेगुरा जंगल में बाघ द्वारा तीन बकरियों और एक बछड़े का शिकार किए जाने की बात सामने आई थी। इससे पहले भंडरिया क्षेत्र में भी पशुओं के शिकार की सूचना मिली थी।
गुरुवार को भंडरिया-रमकंडा-बड़गड़ वन क्षेत्र में बाघ के पगमार्क मिलने के बाद आसपास के गांवों में भय का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि जंगल में मिले पंजों के निशान सामान्य जंगली जानवरों के पदचिह्न से अलग हैं।
गढ़वा के डीएफओ एबीन बेनी अब्राहम ने बताया कि भंडरिया और रमकंडा क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी की सूचना मिली है। पगमार्क की जांच के बाद वन विभाग ने इसकी पुष्टि की है। ग्रामीणों से मिली जानकारी के आधार पर संबंधित क्षेत्रों में वन विभाग की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं।
सुबह-शाम जंगल जाने से बचें ग्रामीण
वन विभाग ने ग्रामीणों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। खासकर सुबह और शाम के समय जंगल की ओर नहीं जाने तथा अनावश्यक रूप से जंगल में प्रवेश करने से बचने को कहा गया है। विभाग ने ग्रामीणों से बाघ की मौजूदगी या उसकी गतिविधि से संबंधित किसी भी जानकारी की तत्काल वन विभाग को सूचना देने की अपील की है।
छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश से जुड़ा है पीटीआर का वन्यजीव कॉरिडोर
पलामू टाइगर रिजर्व झारखंड में बाघों के लिए प्रमुख संरक्षित क्षेत्र है। पीटीआर का वन्यजीव कॉरिडोर छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के वन क्षेत्रों से जुड़ा हुआ है। यह कॉरिडोर मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ और संजय डुबरी टाइगर रिजर्व समेत आसपास के जंगलों से जुड़ता है। इसी वन्यजीव कॉरिडोर के माध्यम से बाघों के एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में आने-जाने की संभावना बनी रहती है।
बाघ के साथ हाथियों की मौजूदगी ने भी बढ़ाई चिंता
गढ़वा जिले के दक्षिणी वन क्षेत्र के जंगलों में बाघ की दस्तक के साथ जंगली हाथियों की मौजूदगी ने भी ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। रंका, भंडरिया, चिनियां, बड़गड़ और रमकंडा के जंगलों में वन्यजीवों की गतिविधियां बढ़ी हैं। पिछले एक सप्ताह में रंका और चिनियां क्षेत्र में जंगली हाथियों के हमले में दो लोगों की मौत हो चुकी है।
एक ओर बाघ द्वारा मवेशियों के शिकार की घटनाओं से ग्रामीणों में भय है, वहीं दूसरी ओर हाथियों के झुंड की मौजूदगी से जंगल से सटे गांवों के लोग परेशान हैं। वन विभाग की ओर से ग्रामीणों को लगातार जागरूक किया जा रहा है।
वन विभाग का कहना है कि वन्यजीव जंगल के प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। विभाग का प्रयास मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करना और ग्रामीणों को सतर्क एवं जागरूक रखना है।
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