गढ़वा में लेप्टोस्पायरोसिस की दस्तक! 2 मरीजों की पुष्टि, बरसात में ऐसे फैलता है संक्रमण; स्वास्थ्य विभाग अलर्ट
गढ़वा जिले में लेप्टोस्पायरोसिस और स्क्रब टाइफस के मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। जिला ...और पढ़ें

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HighLights
गढ़वा में लेप्टोस्पायरोसिस और स्क्रब टाइफस के मरीज मिले, विभाग सतर्क।
डॉ. संतोष मिश्रा ने बीमारियों के लक्षण, कारण और बचाव बताए।
अंजनी कुमार उपाध्याय, गढ़वा। गढ़वा जिले में लेप्टोस्पायरोसिस के मरीज मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से सतर्क हो गया है। प्रभावित और संबंधित क्षेत्रों में स्वास्थ्य टीम द्वारा लगातार निगरानी रखी जा रही है।
इस संक्रामक बीमारी के संबंध में जिला महामारी विशेषज्ञ डॉ. संतोष कुमार मिश्रा ने बताया कि लेप्टोस्पायरोसिस एक बैक्टीरियल बीमारी है, जो दूषित पानी या मिट्टी के माध्यम से मनुष्यों में फैलती है। यदि पानी या मिट्टी लेप्टोस्पायरा बैक्टीरिया से संक्रमित चूहा, कुत्ता, बकरी, गाय, भैंस या घोड़ा जैसे जानवरों के मूत्र से दूषित हो जाए, तो उसके संपर्क में आने वाले व्यक्ति को यह बीमारी अपनी चपेट में ले लेती है।
भ्रम पैदा करते हैं बीमारी के लक्षण
डॉ. संतोष मिश्रा के अनुसार, इस बीमारी के लक्षण काफी अलग-अलग और भ्रमित करने वाले होते हैं। मरीजों में हाई ग्रेड फीवर, कंपकंपी, ठंड लगना, बहुत तीव्र सिरदर्द, पीठ के निचले हिस्से और खास तौर पर कैफ मस्सल (घुटने के नीचे मांसपेशियों) में दर्द देखने को मिलता है।
इसके अलावा आंखों में लालीपन, त्वचा और आंखों का पीलापन यानी पीलिया जैसा लक्षण, मितली, उल्टी तथा दस्त इसके प्रमुख लक्षण हैं। यह बीमारी कभी डायरिया, कभी पीलिया, कभी मलेरिया तो कभी माइग्रेन जैसे लक्षण प्रदर्शित करती है, जिससे समय पर पहचान बेहद जरूरी है।
बरसात में संक्रमण का बढ़ता है खतरा
जिला महामारी विशेषज्ञ ने बताया कि इस बीमारी का संक्रमण त्वचा में बनी खरोंच या आंख, नाक व मुंह की म्यूकस मेंब्रेन के दूषित जल, मिट्टी अथवा सीधे संक्रमित जानवर के संपर्क में आने से फैलता है। वर्षा ऋतु में जलजमाव के कारण इसका संक्रमण तेजी से फैलता है। दूषित पानी में तैरना और खेती-बारी के दौरान कीचड़ के संपर्क में आना संक्रमण का मुख्य कारण बनता है।
बचाव के लिए इन बातों का रखें ध्यान
महामारी विशेषज्ञ ने बचाव के उपाय बताते हुए कहा कि खेती के कार्य के दौरान घुटने तक वाले जूते (गम बूट) पहनें और शरीर पर कटे-छंटे घावों पर वाटरप्रूफ बैंडेज का ही प्रयोग करें। वर्षा ऋतु में जमा पानी से यथासंभव दूरी बनाए रखना जरूरी है। यदि घर में कोई जानवर बीमार हो तो उसकी देखभाल के दौरान उसके मूत्र के सीधे संपर्क में आने से बचें।
जानवरों की देखभाल के दौरान दस्ताने, मास्क और आंखों पर सादा चश्मा जैसे प्रोटेक्टिव वियर का प्रयोग करें। संक्रमण के लक्षण दिखने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जाकर इलाज कराएं, जहां इसकी जांच और इलाज पूर्णतया निशुल्क उपलब्ध है।
जिले में मरीजों की वर्तमान स्थिति
जिले में मामलों की पुष्टि करते हुए डॉ. संतोष कुमार मिश्रा ने बताया कि अभी तक बड़गड़ में एक और खरौंधी में एक मरीज की आधिकारिक पुष्टि हुई है। वहीं बड़गड़ के एक अन्य मरीज ने लातेहार के एक निजी अस्पताल में रैपिड डायग्नोस्टिक किट से जांच कराई है, जिसकी अभी औपचारिक तौर पर पुष्टि नहीं की जा सकती है। उसके सैंपल रिम्स रांची भेजकर जांच कराई जा रही है। फिलहाल जिले में केवल दो मरीजों की ही आधिकारिक पुष्टि हुई है।
बड़गड़ में अन्य चार मरीजों में स्क्रबटाइफस की पुष्टि हुई है। बड़गड़ क्षेत्र में जारी चर्चाओं पर स्थिति स्पष्ट करते हुए उन्होंने बताया कि जिन सात मरीजों की चर्चा हो रही है, उनमें से चार मरीज स्क्रब टाइफस के हैं।
स्क्रब टाइफस भी एक संक्रामक बीमारी है, जो ओरिएंशिया सुसुगमुशी नामक बैक्टीरिया से संक्रमित चिग्गर नामक माइट यानी मकड़ी के काटने से फैलती है। कीड़े के काटने का निशान कुछ समय तक त्वचा पर बना रहता है, जिसके बीच में काला और किनारों पर लाल धब्बा दिखाई देता है। जबकि स्क्रबटाइफस के भी कई लक्षण लेप्टोस्पायरोसिस जैसे ही होते हैं।
