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शादी हो या बीमारी, हर बार पगडंडी का सहारा! आजादी के 78 साल बाद भी सुविधाओं से दूर है गढ़वा का यह गांव 

Published: Sat, 12 Sep 2026 11:22 AM (GMT+05:30)

गढ़वा के खरौंधी प्रखंड स्थित लामी सरहिया गांव आजादी के 78 साल बाद भी पक्की सड़क से वंचित है, जिससे ...और पढ़ें

लामी सरहिया गांव में 78 साल बाद भी पक्की सड़क नहीं। जागरण

लामी सरहिया गांव में 78 साल बाद भी पक्की सड़क नहीं। जागरण

HighLights

  1. लामी सरहिया गांव में 78 साल बाद भी पक्की सड़क नहीं।

  2. सड़क के अभाव में बच्चों की पढ़ाई और शादी-विवाह प्रभावित।

संवाद सूत्र, खरौंधी (गढ़वा)। प्रखंड कार्यालय के समीप बसा लामी सरहिया गांव आजादी के 78 वर्ष बीत जाने के बाद भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। गांव तक पहुंचने के लिए अब तक पक्की सड़क का निर्माण नहीं हो सका है।

ग्रामीण आज भी मुख्य पथ से पगडंडी के सहारे गांव तक आने-जाने को मजबूर हैं। सड़क के अभाव में सबसे अधिक परेशानी मरीजों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और स्कूली बच्चों को उठानी पड़ती है।

ग्रामीणों के अनुसार लामी सरहिया में करीब 80 से 90 लोगों की आबादी है। गांव के लोगों का मुख्य आवागमन खरौंधी प्रखंड कार्यालय के समीप स्थित मुख्य पथ से होता है। लेकिन मुख्य सड़क से गांव तक सुगम रास्ता नहीं होने के कारण ग्रामीणों को पगडंडी का सहारा लेना पड़ता है। बरसात के दिनों में यह पगडंडी भी कीचड़ और पानी से भर जाती है, जिससे पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है।

मरीजों को डोली-खटोली से लाने की मजबूरी

सड़क नहीं होने का सबसे गंभीर असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में किसी व्यक्ति के बीमार पड़ने या आपात स्थिति उत्पन्न होने पर वाहन गांव तक नहीं पहुंच पाता। ऐसी स्थिति में मरीज को डोली-खटोली के सहारे मुख्य सड़क तक लाना पड़ता है। इसके बाद वाहन की मदद से मरीज को इलाज के लिए भवनाथपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अथवा अन्य अस्पताल ले जाना पड़ता है।

ग्रामीणों ने बताया कि गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए अस्पताल ले जाना सबसे चुनौतीपूर्ण होता है। महिला को पहले डोली-खटोली से पगडंडी के रास्ते मुख्य सड़क तक पहुंचाया जाता है। कई बार रास्ते की खराब स्थिति और अस्पताल पहुंचने में होने वाली देरी के कारण प्रसव पीड़ा रास्ते में ही शुरू हो जाती है। ऐसी परिस्थिति में परिजनों को काफी परेशानी और जान जोखिम जैसे समस्या का सामना करना पड़ता है।

शादी-विवाह में भी परेशानी

ग्रामीणों के मुताबिक सड़क के अभाव का असर गांव के सामाजिक जीवन पर भी पड़ रहा है। गांव में शादी-विवाह होने पर बारात की गाड़ियां गांव तक नहीं पहुंच पाती हैं। दूल्हे और बारातियों को मुख्य सड़क अथवा ब्लॉक कार्यालय के समीप वाहन से उतरकर पैदल गांव तक पहुंचना पड़ता है। शादी के बाद दुल्हन को भी पैदल मुख्य सड़क तक पहुंचाकर वाहन में बैठाना पड़ता है।

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की समस्या के कारण रिश्तेदार भी गांव में शादी-विवाह करने से हिचकिचाते हैं। अपने बच्चों की शादी गांव में करने के लिए रिश्तेदारों को काफी समझाना-बुझाना पड़ता है।

बरसात में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित

लामी सरहिया के बच्चे खरौंधी विद्यालय में पढ़ने जाते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि सामान्य दिनों में बच्चे किसी तरह पगडंडी के रास्ते विद्यालय पहुंच जाते हैं, लेकिन बारिश के मौसम में रास्ता बेहद खराब हो जाता है। पानी की बहाव तेज और जगह जगह कीचड़ के कारण बच्चों का विद्यालय जाना मुश्किल हो जाता है। इससे उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है।

ग्रामीणों का आरोप है कि गांव की सड़क बनवाने के लिए मुखिया सहित विभिन्न जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से कई बार गुहार लगाई गई, लेकिन अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क नहीं होने के कारण गांव का विकास भी प्रभावित हो रहा है। ग्रामीणों ने प्रखंड प्रशासन और जिला प्रशासन से गांव तक सड़क निर्माण कराने की मांग की है।

क्या कहते हैं ग्रामीण?

लामी सरहिया निवासी सतन चौधरी, गुड्डू कुमार पासवान, टेकानी पासवान, कुलदीप पासवान, सुषमा देवी, जीरा देवी, शांति देवी, चंद्रावती देवी, प्रेमा देवी, कुसुम देवी, प्रभावती देवी सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि गांव में करीब 80-90 लोगों की आबादी है, लेकिन मुख्य पथ से गांव तक सड़क नहीं है।

ग्रामीणों ने कहा कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी सड़क जैसी मूलभूत सुविधा के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। उन्होंने प्रशासन से जल्द सड़क निर्माण की दिशा में पहल करने की मांग की है।

क्या कहते हैं मुखिया पति?

इस संबंध में मुखिया पति सतीश राम ने बताया कि लामी सराहिया गांव तक सड़क निर्माण कराने के लिए कई बार प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण के लिए पर्याप्त जमीन उपलब्ध नहीं होने के कारण अब तक सड़क का निर्माण नहीं कराया जा सका है। यदि सड़क के किनारे आवश्यक जमीन उपलब्ध हो जाती है तो सड़क निर्माण जल्द से जल्द कराने का प्रयास किया जाएगा। 

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