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शिक्षा विभाग के लिपिकों को झारखंड हाईकोर्ट से मिली बड़ी राहत, ट्रांसफर मामले पर 12 सप्ताह में होगा फैसला

Published: Thu, 13 Aug 2026 10:45 AM (IST)

झारखंड हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग के लिपिकों के स्थानांतरण मामले में महत्वपूर्ण आदेश दिया है। अदालत ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक ...और पढ़ें

झारखंड हाईकोर्ट की फाइल फोटो।

झारखंड हाईकोर्ट की फाइल फोटो।

HighLights

  1. हाईकोर्ट ने लिपिकों के स्थानांतरण मामले में दिया महत्वपूर्ण आदेश।

  2. निर्णय तक लिपिकों को वर्तमान पद पर नहीं हटाया जाएगा।

जागरण संवाददाता, गढ़वा। क्षेत्रीय शिक्षा संयुक्त निदेशक द्वारा शिक्षा विभाग के उच्च वर्गीय लिपिक प्रदीप कुमार सिंह, ओम प्रकाश सिंह, इम्तियाज अली व प्रशांत बिहारी आदि के स्थानांतरण से जुड़े मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है।

W.P.(S) No. 6000/2026 प्रदीप कुमार सिंह वर्सेस स्टेट ऑफ झारखंड व W.P.(S) No. 5997/2027 ओम प्रकाश सिंह एंड अदर्स वर्सेस स्टेट ऑफ झारखंड की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक को निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता के मामले को उनके प्रतिनिधित्व के रूप में मानते हुए नए सिरे से विचार कर निर्णय लिया जाए। यह निर्णय आदेश की प्रति प्राप्त होने की तारीख से 12 सप्ताह के भीतर लेने का निर्देश दिया गया है।

मामला प्रदीप कुमार सिंह सहित, ओम प्रकाश सिंह, इम्तियाज अली, प्रशांत बिहारी आदि लिपिकों के क्षेत्रीय शिक्षा संयुक्त निदेशक मेदनीनगर द्वारा 29 जुलाई 2026 के ज्ञापांक संख्या 198 के माध्यम से किए गए स्थानांतरण से संबंधित है। याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में दलील दी गई कि उनके स्थानांतरण के मामले में माध्यमिक शिक्षा निदेशक द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का अनुपालन नहीं किया गया।

निदेशक के 12 जून के निर्देश के आलोक में करना होगा विचार :

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि इस संबंध में संबंधित प्राधिकारी के समक्ष पहले ही प्रतिनिधित्व दिया जा चुका है। उन्होंने मांग की कि संबंधित प्राधिकारी को मामले पर पुनर्विचार कर माध्यमिक शिक्षा निदेशक के 12 जून 2026 के निर्देश के आलोक में निर्णय लेने का निर्देश दिया जाए।

साथ ही निर्णय होने तक याचिकाकर्ता को उनके वर्तमान स्थान पर परेशान नहीं करने की मांग की गई। इस पर प्रतिवादियों की ओर से उपस्थित अधिवक्ता ने कोई गंभीर आपत्ति नहीं जताई।

प्रतिनिधित्व के निस्तारण तक नहीं किया जाएगा परेशान

अदालत ने मामले की परिस्थितियों और याचिकाकर्ता की प्रार्थना को देखते हुए रिट याचिका का निस्तारण कर दिया। अदालत ने चौथे प्रतिवादी यानी निदेशक, माध्यमिक शिक्षा को निर्देश दिया कि रिट याचिका को याचिकाकर्ता के प्रतिनिधित्व के रूप में मानकर उस पर विचार करें और निर्धारित अवधि में निर्णय लें।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मुकदमों की बहुलता और भ्रम की स्थिति से बचने के लिए प्रतिनिधित्व के निस्तारण तक याचिकाकर्ता को परेशान नहीं किया जाएगा। याचिकाकर्ता को आदेश की प्रति चौथे प्रतिवादी को यथाशीघ्र उपलब्ध कराने का निर्देश भी दिया गया है।

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