गढ़वा : समाहरणालय परिसर में स्कूटी लगाने के विवाद में ड्यूटी पर तैनात आरक्षी रामकुमार तिवारी एवं कार्यपालक दंडाधिकारी गुलजार अंजुम के बीच हुई तीखी नोंकझोंक के मामले को जिला प्रशासन ने हस्तक्षेप कर पटाक्षेप कर दिया गया है। विवाद के बाद आरक्षी रामकुमार तिवारी को फिर से समाहरणालय परिसर में ड्यूटी पर लगा दी गई। गुरूवार को आरक्षी ने समाहरणालय परिसर में ड्यूटी की। पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि मेरी ड्यूटी जिस काम के लिए लगाई गई थी। वह मैंने किया था। ज्ञात को कि कार्यपालक दंडाधिकारी से नोकझोंक के बाद तिवारी को बुधवार को लाइन हाजिर कर दिया गया था। गुरुवार को इस मामले का पटाक्षेप करते हुए उपायुक्त हर्ष मंगला ने स्वयं इस मसले पर बयान जारी किया है। जिसमें उपायुक्त ने कहा है कि सिविल व पुलिस पदाधिकारी एक व्यवस्था के तहत कई स्तर की परत दर परत नियंत्री पदाधिकारियों के तहत काम करते हैं। ड्यूटी के दौरान न सिर्फ सजगता बल्कि अपने शक्तियों, अधिकारों और दायित्वों का बोध होना अनिवार्य है। गलती यदि कार्यपालक दंडाधिकारी की भी थी तो जवान को बहस या अनादर करने के बजाय सुरक्षा दल के नियंत्री हवलदार के माध्यम से शिकायत एसपी या डीसी से करनी चाहिए थी। यदि व्यवस्था का पालन नहीं किया जाएगा तो फौजी अपने कमांडर के विरूद्ध ही बंदूक तान देगा। उपायुक्त ने मीडिया से न्यायिक एवं स्थापित नियमावली को बढ़ावा देने की अपील की है।

Posted By: Jagran

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप