गढ़वा में आवारा कुत्तों का आतंक: एक घंटे में पांच लोगों को बनाया निशाना, नदी किनारे शौच गई बच्ची का कान नोंचा
गढ़वा में आवारा कुत्तों का आतंक बढ़ गया है, जहां एक घंटे में पांच लोगों पर हमला हुआ और एक ...और पढ़ें

शहर में आवारा कुत्तों के कारण गढ़वा सदर अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ गई है।
HighLights
गढ़वा में आवारा कुत्तों ने एक घंटे में पांच को घायल किया।
एक बच्ची का कान बुरी तरह नोंचा, अस्पताल में भर्ती।
नगर परिषद की लापरवाही पर स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश।
संस, गढ़वा। गढ़वा नगर परिषद क्षेत्र में आवारा कुत्तों का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि अब आम नागरिकों का घरों से बाहर निकलना भी दूभर हो गया है।
शहर में एक के बाद एक दिल दहला देने वाली घटनाएं सामने आ रही हैं। ताजा मामले में रंका मोड़ और दानरो नदी के पास एक कुत्ते ने महज एक घंटे के भीतर पांच लोगों पर हमला कर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया।
इस सिलसिलेवार हमले के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी और दहशत का माहौल है। घायलों में गढ़वा शहर के टंडवा निवासी मथुरा प्रसाद केशरी, पोटमा निवासी संजय तिवारी, हंटरगंज निवासी अरुण कुमार और कुदुरूम निवासी ओमप्रकाश सिंह सहित कुल पांच लोग शामिल हैं।
इस अचानक हुए खूनी हमले के बाद से स्थानीय लोगों में भारी भय व्याप्त है, और लोगों को आशंका है कि यह कुत्ता अन्य राहगीरों को भी अपना निशाना बना सकता है।
इससे महज एक दिन पहले, शनिवार को गढ़वा शहर के दीपुआं मोहल्ला निवासी उमेश रजक की 10 वर्षीय पुत्री ऋतिका कुमारी भी आवारा कुत्तों के खौफ का शिकार बन चुकी है।
ऋतिका अपनी हमउम्र सहेली के साथ सरस्वतिया नदी के पास गई थी। नदी किनारे शौच करने के दौरान एक खूंखार आवारा कुत्ते ने अचानक उस पर हमला कर दिया और बच्ची का बायां कान बुरी तरह नोंच डाला।
साथ मौजूद बच्ची के शोर मचाने पर आसपास के लोग तुरंत दौड़े और बड़ी मुश्किल से मासूम को बचाया। परिजनों ने उसे तत्काल गढ़वा सदर अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसका इलाज चल रहा है।
शहर में आवारा कुत्तों की समस्या कोई नई नहीं है, लेकिन नगर परिषद प्रशासन की घोर लापरवाही के कारण ऐसी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जो आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर रही हैं।
आए दिन राहगीरों, बुजुर्गों और छोटे बच्चों पर कुत्तों के हमले की बढ़ती घटनाओं से नागरिकों में गहरा आक्रोश है। स्थानीय लोगों और पीड़ितों के स्वजन ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द ठोस कदम उठाए जाएं।
