बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ... लेकिन शौचालय कहां जाएं? गढ़वा के कन्या विद्यालय में 160 छात्राओं की परेशानी
भंडरिया के प्रोजेक्ट कन्या उच्च विद्यालय में 160 छात्राएं शौचालय की कमी से जूझ रही हैं, जिससे उन्हें खुले में ...और पढ़ें

एआई जेनरेटेड इमेज।
HighLights
भंडरिया स्कूल की 160 छात्राएं शौचालय के अभाव में।
जर्जर शौचालय और पानी की कमी से परेशानी।
देवानंद कुमार, भंडरिया (गढ़वा)। भंडरिया प्रखंड का इकलौता प्रोजेक्ट कन्या उच्च विद्यालय में अध्ययनरत छात्राएं शौचालय जैसी मूलभूत समस्याओं से आज भी जूझ रही है।
विद्यालय में शौचालय नहीं रहने के कारण विद्यालय के नौवीं तथा दसवीं में अध्ययनरत कुल 160 छात्राएं शौच के लिए अपने आप को असहज महसूस करती हैं तथा विद्यालय से बाहर शौच के लिए जाने को जाने मजबूर हैं। इस दौरान छात्राएं अपने आपको असुरक्षित महसूस करते हुए भययुक्त माहौल मे रहती हैं।
जानकारी के अनुसार, विद्यालय में दो बार पंचायत निधि से शौचालय का निर्माण कार्य कराया गया था। लेकिन पानी के अभाव व पूर्ण सुविधा नहीं रहने के कारण वर्तमान में शौचालय काफी जर्जर हो गया हैं व शौचालय के दरवाजा भी टूट गया है। जिससे विद्यालय की छात्राओं को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
बताया जा रहा है कि विद्यालय के प्रधानाध्यापक वीरेंद्र तिवारी ने कई बार विभाग व स्थानीय जनप्रतिनिधियों को लिखित आवेदन देकर विद्यालय में शौचालय निर्माण की मांग की। परंतु अभी तक कोई ठोस पहल नहीं की गई।
लड़की स्कूल होने के बावजूद भी विद्यालय में शौचालय नहीं होने कारण जहां एक और विद्यालय में अध्ययनरत छात्राओं को शौच के कई तरह के परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, वहीं विद्यालय के शिक्ष- शिक्षिकाओं को भी काफी कठिनाइयां हो रही है।
विद्यालय में शौचालय नहीं होने के कारण विद्यालय में अध्ययनरत छात्राएं शौच के लिए काफी असहज महसूस करती हैं। वहीं शौच के लिए विद्यालय से बाहर जाने में अपने आप को असुरक्षित महसूस करते हुए भययुक्त वातावरण में रहने को मजबूर हैं।
-अनु केशरी, शिक्षिका।
विद्यालय में शौचालय नहीं रहने के कारण हमलोगों को शौच के लिए विद्यालय से बाहर जाना पड़ता है। जिस कारण बच्चों का पढ़ाई भी बाधित हो जाता है। विद्यालय में शौचालय है भी तो काफी जर्जर व जीर्णशीर्ण स्थिति में है। साथ ही उसमें पानी की भी व्यवस्था नहीं है। जिस कारण हम लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
-प्राण कृष्णा रजक, शिक्षक।
विद्यालय में शौचालय नहीं रहने के कारण विद्यालय की छात्राओं सहित हम शिक्षिकाओं को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। खासकर बरसात के दिनों में तो और भी ज्यादा दिक्कतें होती हैं। जब विद्यालय परिसर में काफी झाड़ निकल जाते हैं तथा कीचड़ हो जाते हैं।
-शीलमणी भेंगरा, शिक्षिका।
संबंधित विभाग तथा स्थानीय जनप्रतिनिधियों से कई बार लिखित आवेदन देकर विद्यालय में शौचालय निर्माण की मांग किया हूं। परंतु आज तक इस पर कोई ठोस पहल नहीं किया गया है। विद्यालय में शौचालय नहीं रहने के कारण विद्यालय की छात्राओं पर इसका बुरा प्रभाव पड़ रहा है।
-वीरेंद्र तिवारी, प्रधानाध्यापक।