कम बारिश से गढ़वा के किसानों ने बदला खेती का तरीका, अरहर-तिलहन की ओर बढ़े कदम
केतार प्रखंड में कम वर्षा के कारण किसानों ने धान की बजाय अरहर और तिलहन जैसी वैकल्पिक फसलों को अपनाना ...और पढ़ें

केतार में कम वर्षा से धान की खेती प्रभावित हुई। एआई जेनरेटेड इमेज
HighLights
केतार में कम वर्षा से धान की खेती प्रभावित हुई।
किसान अरहर, तिलहन और मोटे अनाज की ओर मुड़े।
संवाददाता जागरण, केतार (गढ़वा)। प्रखंड में इस वर्ष सामान्य से काफी कम वर्षा होने के कारण खरीफ खेती का स्वरूप बदलता नजर आ रहा है। धान की रोपाई का समय होने के बावजूद पर्याप्त बारिश नहीं होने से किसान चिंतित हैं।
ऐसे में बड़ी संख्या में किसान बाजार से अरहर, तिल, मक्का तथा अन्य मोटे अनाज के बीज खरीद रहे हैं, ताकि कम पानी में भी बेहतर उत्पादन लेकर नुकसान से बचा जा सके।
कृषि विभाग के अनुसार, सरकार ने इस खरीफ मौसम में अरहर, तिलहन एवं मोटे अनाज की खेती को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया है। विभाग द्वारा किसानों को इन फसलों के उन्नत बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं तथा कम वर्षा की स्थिति में वैकल्पिक खेती अपनाने की सलाह दी जा रही है।
केतार प्रखंड में अरहर एवं तिलहन की खेती के लिए 915 हेक्टेयर का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वहीं भवनाथपुर में 1300 हेक्टेयर और खरौंधी में 1380 हेक्टेयर क्षेत्र का लक्ष्य तय किया गया है। ज्वार, बाजरा और मड़ुआ की खेती के लिए भी अलग-अलग लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। धान की खेती करने वाले किसानों को 105 से 110 दिनों में तैयार होने वाली आईआर-36 किस्म अपनाने की सलाह दी जा रही है।
बारिश के आंकड़े किसानों की चिंता और बढ़ा रहे हैं। पिछले वर्ष 3 जुलाई 2025 तक प्रखंड में 381.9 मिमी वर्षा दर्ज की गई थी, जबकि इस वर्ष 3 जुलाई 2026 तक मात्र 33.8 मिमी बारिश हुई है। यानी पिछले वर्ष की तुलना में केवल लगभग 11 प्रतिशत वर्षा हुई है।
ऐसे में खेतों में नमी की कमी के कारण धान की रोपाई प्रभावित हो रही है और किसानों के सामने खेती की लागत निकलने की भी चिंता खड़ी हो गई है।
क्या कहते है किसान?
समय पर बारिश नहीं होने से धान की खेती करना जोखिम भरा हो गया है। इसलिए इस बार उन्होंने अरहर और तिल की खेती करने का निर्णय लिया है, जिससे कम पानी में भी कुछ उत्पादन मिल सके।
-विश्वनाथ साह, किसान।
आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो धान की खेती करना मुश्किल हो जाएगा। ऐसे में किसान वैकल्पिक फसलों की ओर रुख कर रहे हैं ताकि आर्थिक नुकसान कम हो सके।
-जीतन साह किसान।
धान की बिछड़े कर दिए है लेकिन खेत सूखे पड़े हैं। अगर जल्द बारिश नहीं हुई तो धान की फसल पर बड़ा असर पड़ेगा।
-नेयजुदिन अंसारी, किसान
इस वर्ष लगभग 30 प्रतिशत कम वर्षा की स्थिति को देखते हुए कृषि विभाग किसानों की आय सुरक्षित रखने के लिए अरहर, तिलहन एवं मोटे अनाज की खेती पर विशेष फोकस कर रहा है। किसानों को उन्नत बीज उपलब्ध कराने के साथ-साथ तकनीकी सलाह भी दी जा रही है, ताकि कम वर्षा की स्थिति में भी बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सके।
-राकेश कुमार, बीटीएम , केतार, भवनाथपुर, खरौंधी।
