गढ़वा में गहराया सूखे का संकट, अब तक सामान्य से 58 प्रतिशत कम बारिश; धान की रोपनी महज 31% पर अटकी
गढ़वा जिला भीषण सूखे की चपेट में है, जहां 13 अगस्त 2026 तक सामान्य से 58% कम वर्षा दर्ज की ...और पढ़ें

गढ़वा में रोपणी। फोटो जागरण
HighLights
गढ़वा में सामान्य से 58% कम वर्षा, सूखे का संकट।
धान की रोपाई लक्ष्य का केवल 31.13% ही हुई।
किसान सरकार से सूखा राहत पैकेज की मांग कर रहे।
अंजनी कुमार उपाध्याय, गढ़वा। मानसून की दगाबाजी और बादलों की बेरुखी ने गढ़वा जिले को एक बार फिर भीषण सुखाड़ के मुहाने पर ला खड़ा किया है। अगस्त का आधा महीना बीत जाने के बाद भी जिले में औसत वर्षा का आधा आंकड़ा भी पूरा नहीं हो सका है।
जिला कृषि कार्यालय द्वारा जारी 13 अगस्त 2026 तक की आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, जिले में सामान्य वर्षापात 779.4 मिमी के मुकाबले महज 327.6 मिमी यानी 42 प्रतिशत ही वर्षा दर्ज की गई है। इस भीषण जल संकट के कारण जिले की मुख्य फसल धान का आच्छादन पूरी तरह चरमरा गया है।
जिले में धान रोपाई का लक्ष्य 56,400 हेक्टेयर रखा गया था, लेकिन पानी के अभाव में अब तक महज 17,560 हेक्टेयर यानी 31.13 प्रतिशत में ही रोपनी हो सकी है।
वर्षा का सूखा गणित : पिछले साल से भी बदतर हालात
मौसम की बेरुखी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जून से लेकर अगस्त तक हर महीने वर्षा के आंकड़ों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। जून 2026 में सामान्य वर्षापात 138.8 मिमी होना चाहिए था, लेकिन महज 15.6 मिमी वर्षा हुई, जबकि गत वर्ष 2025 में 158.8 मिमी वर्षा हुई थी। जुलाई 2026 में सामान्य 362.4 मिमी के मुकाबले महज 212.8 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जबकि गत वर्ष इस अवधि में 381.9 मिमी वर्षा हुई थी।
वहीं, 13 अगस्त 2026 तक सामान्य 278.2 मिमी के विरुद्ध केवल 99.2 मिमी ही वर्षा हो सकी है। कुल मिलाकर, मानसून के मुख्य महीनों में अब तक जिले को सामान्य की तुलना में 58 प्रतिशत से अधिक की वर्षा की कमी का सामना करना पड़ रहा है।
विगत तीन चार दिनों से रात हुई वर्षा ने किसानों के कलेजे को ठंडक थी और धान रोपाई की रफ्तार जरूर बढ़ी। लेकिन दो दिनों से निकले तेज धूप किसानों के दिल जलाकर राख करने वाली रही है। कुल मिलाकर इसे सुखाड़ का ही संकेत माना जा रहा है।
फसलों की स्थिति : मक्का और तेलहन राहत, धान व मोटे अनाज बेहाल
कम वर्षा के कारण जहां धान और मोटे अनाज की खेती पर तुषारापात हुआ है, वहीं कम पानी वाली फसलों जैसे मक्का, दलहन और तेलहन ने किसानों को कुछ हद तक राहत दी है।
धान के कुल लक्ष्य 56,400 हेक्टेयर के सापेक्ष केवल 17,560 हेक्टेयर में ही आच्छादन हुआ है, जो लक्ष्य का 31.13 प्रतिशत है। खेत सूख चुके हैं और बिचड़े पीले पड़ रहे हैं। यह आंकड़ा भी मक्के की फसल में किसानों ने अच्छा प्रदर्शन किया है।
इसके 27,650 हेक्टेयर लक्ष्य के मुकाबले 26,890 हेक्टेयर यानी 97.25 प्रतिशत में बुआई पूरी हो चुकी है। दलहनी फसलों का कुल आच्छादन 76.29 प्रतिशत दर्ज किया गया है, जो 34,180 हेक्टेयर होता है।
दलहन में अरहर की स्थिति बेहतर है, जहां 29,000 हेक्टेयर के मुकाबले 27,890 हेक्टेयर यानी 96.17 प्रतिशत बुआई हुई है। उरद में 10,000 हेक्टेयर के मुकाबले 6,050 हेक्टेयर यानी 60.50 प्रतिशत और मूंग में 1,500 हेक्टेयर के मुकाबले महज 180 हेक्टेयर यानी 12 प्रतिशत बुआई हो पाई है।
तेलहनी फसलों का कुल आच्छादन 90.15 प्रतिशत रहा है, जिसमें 4,850 हेक्टेयर में बुआई हुई है। इसमें मूंगफली का आच्छादन 2,970 हेक्टेयर के सापेक्ष 2,865 हेक्टेयर यानी 96.46 प्रतिशत और तिल का आच्छादन 2,050 हेक्टेयर के सापेक्ष 1,985 हेक्टेयर यानी 96.83 प्रतिशत दर्ज किया गया है।
मोटे अनाज यानी श्रीअन्न की खेती की स्थिति सबसे चिंताजनक है। कुल 3,610 हेक्टेयर लक्ष्य के मुकाबले महज 110 हेक्टेयर यानी 3.05 प्रतिशत में ही बुआई हो सकी है। इसमें ज्वार 6.67 प्रतिशत और मडुआ 2.94 प्रतिशत ही बोया जा सका है, जबकि बाजरा की बुआई शून्य प्रतिशत पर है।
किसानों की उम्मीदों पर फिरा पानी, राहत पैकेज की मांग तेज
जिले में कुल खरीफ बुआई का लक्ष्य 1,37,840 हेक्टेयर था, जिसके विरुद्ध अब तक 83,590 हेक्टेयर यानी 60.64 प्रतिशत ही आच्छादित हो सका है।
अगर अगले एक सप्ताह में मूसलाधार वर्षा नहीं होती है, तो बचा-खुचा 31 प्रतिशत धान भी खेतों में ही सूख जाएगा। क्योंकि इस वर्ष अब तक मुसलाधार वर्षा नहीं होने से आहर पोखर में भी पानी जमा नहीं हुआ है। जिले के किसान अब वैकल्पिक खेती और सरकार से सूखा राहत घोषित कर मुआवजा देने की आस लगाए बैठे हैं।
