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हेमंत सोरेन की मां पर टिप्पणी का मामला, गढ़वा विधायक सत्येन्द्रनाथ तिवारी पर FIR दर्ज करने की मांग

Published: Sun, 04 Oct 2026 06:40 PM (IST)

गढ़वा विधायक सत्येन्द्रनाथ तिवारी के खिलाफ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां रूपी सोरेन पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने का मामला सामने आया है।

गढ़वा विधायक सत्येन्द्रनाथ तिवारी। (फाइल फोटो)

गढ़वा विधायक सत्येन्द्रनाथ तिवारी। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. गढ़वा विधायक पर रूपी सोरेन के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी का आरोप।

  2. रंका थाना में शिकायत दर्ज, प्राथमिकी दर्ज करने की मांग।

  3. अनुसूचित जनजाति समुदाय की भावनाएं आहत होने का आरोप।

संवाद सूत्र, रंका (गढ़वा)। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां और स्व. शिबू सोरेन की पत्नी रूपी सोरेन के खिलाफ अभद्र एवं अपमानजनक टिप्पणी करने के मामले में गढ़वा विधायक सत्येन्द्रनाथ तिवारी कानूनी शिकंजे में फंसते नजर आ रहे हैं।

इस संबंध में रंका थाना क्षेत्र के गासेदाग गांव निवासी श्रवण कुमार सिंह (पिता स्व. जगनारायण सिंह) ने रंका थाना प्रभारी को आवेदन देकर गढ़वा विधायक के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने की गुहार लगाई है।

आवेदन में शिकायतकर्ता ने उल्लेख किया है कि बीते 28 सितंबर 2026 को उन्होंने एक यूट्यूब चैनल पर प्रसारित एक वीडियो देखा।

उक्त वीडियो में गढ़वा विधायक सत्येन्द्रनाथ तिवारी द्वारा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पूजनीय माता जी एवं पद्मभूषण से सम्मानित स्व० शिबू सोरेन की पत्नी रूपी सोरेन, जो स्वयं अनुसूचित जनजाति समुदाय की सदस्य हैं, के संबंध में अत्यंत आपत्तिजनक और अपमानजनक बातें कही गई हैं।

तेजी से वायरल हो रहा वीडियो

शिकायतकर्ता का कहना है कि इंटरनेट मीडिया पर तेजी से प्रसारित इस वीडियो से न केवल उन्हें व्यक्तिगत रूप से गहरा आघात पहुंचा है, बल्कि इससे अनुसूचित जनजाति समुदाय की भावनाएं भी आहत हुई हैं।

यह टिप्पणी ऐसे नाजुक समय में की गई, जब रूपी सोरेन अस्पताल में भर्ती थीं और पूरा प्रदेश उनके शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना कर रहा था। शिकायतकर्ता ने अपने आवेदन के साथ उक्त वीडियो का साक्ष्य पेन ड्राइव में संलग्न कर पुलिस को सौंपा है।

उन्होंने पुलिस से मांग की है कि विधायक के इस कृत्य को मानहानि, अपमान तथा अनुसूचित जनजाति समुदाय के प्रति अपमानजनक व्यवहार मानते हुए भारतीय न्याय संहिता, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत मामला दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।

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