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दुमका में 10 नवंबर को आदिवासियों का धर्म सम्मेलन ,बिरसा मुंडा स्टेडियम में जुटेंगे श्रद्धालु, गांव में तैयारी तेज

Published: Wed, 28 Oct 2026 10:39 AM (IST)

दुमका के बिरसा मुंडा स्टेडियम में 10 नवंबर को संताल आदिवासियों का भव्य धर्म सम्मेलन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

दुमका के रानीश्वर प्रखंड में 10 नवंबर को होने वाले धर्म सम्मेलन की तैयारी बैठक में मौजूद ग्रामीण

दुमका के रानीश्वर प्रखंड में 10 नवंबर को होने वाले धर्म सम्मेलन की तैयारी बैठक में मौजूद ग्रामीण

HighLights

  1. 10 नवंबर को दुमका में संताल धर्म सम्मेलन।

  2. बिरसा मुंडा स्टेडियम में होगा सांस्कृतिक कार्यक्रम।

  3. ग्रामीणों का 'एक मुट्ठी चावल, 5 रुपये' सहयोग।

जागरण संवाददाता, दुमका। संताल आदिवासियों की धार्मिक आस्था, रीति-रिवाज, भाषा-संस्कृति और सामाजिक एकजुटता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से आगामी 10 नवंबर को दुमका के बिरसा मुंडा आउटडोर स्टेडियम में एक भव्य धर्म सम्मेलन सह सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।

दिसोम मांझी थान आर जाहेर थान समिति के बैनर तले आयोजित इस ऐतिहासिक कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए ग्रामीण इलाकों में तैयारियों का दौर तेज हो गया है। सम्मेलन में अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से दुमका जिले के रानीश्वर प्रखंड के विभिन्न गांवों में लगातार रणनीति बैठकें की जा रही हैं।

'आतु मोड़े होड़' के नेतृत्व में गांवों में बैठकों का दौर

रानीश्वर प्रखंड के कठलिया, गुलामशूली, डूहुमुर्गा, रखालपहाड़ी, कुरुशिला और मोहनपुर सहित आसपास के तमाम गांवों में 'आतु मोड़े होड़' (गांव का संचालन करने वाले पारंपरिक सामाजिक अगुवा) की अध्यक्षता में ग्रामीणों की बैठकें हो रही हैं। इन बैठकों में हर घर से लोगों को धर्म सम्मेलन में शिरकत करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। साथ ही, गांवों से सामूहिक रूप से दुमका पहुंचने के लिए प्रतिभागियों की सूची तैयार की जा रही है।

'एक मुट्ठी चावल और 5 रुपये' का अनोखा सामुदायिक सहयोग

धर्म सम्मेलन को पूरी तरह से आत्मनिर्भर और सामुदायिक भागीदारी का प्रतीक बनाने के लिए ग्रामीणों ने एक अनूठी पहल की है। इसके तहत मरांग बुरु के प्रत्येक भक्त सम्मेलन स्थल पर अपने साथ एक मुट्ठी चावल और पांच रुपये का अंशदान लेकर पहुंचेंगे। ग्रामीणों की इस सोच को आदिवासी समाज में धार्मिक आस्था, परस्पर सहयोग और सामाजिक ताने-बाने को मजबूत करने वाले ऐतिहासिक कदम के रूप में देखा जा रहा है।

पारंपरिक परिधान में पहुंचेगी नई व पुरानी पीढ़ी

ग्रामीणों ने यह भी सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि सम्मेलन में सभी श्रद्धालु अपनी समृद्ध सांस्कृतिक पहचान यानी पारंपरिक आदिवासी परिधान में शामिल होंगे। इसके तहत पुरुष पंची और महिलाएं पंची-पहान पहनकर दुमका पहुंचेंगे।

ग्रामीणों और सामाजिक अगुवाओं का कहना है कि ऐसे राष्ट्रीय और क्षेत्रीय आयोजनों से न केवल संताली संस्कृति और रीति-रिवाजों का संरक्षण होता है, बल्कि नई पीढ़ी को भी अपनी जड़ों, भाषा, परंपरा और धार्मिक पहचान पर गर्व करने का अवसर मिलता है।

बैठक में मुख्य रूप से मकलू सोरेन, दिनेश सोरेन, बाबूलाल मुर्मू, बेंजामिन मुर्मू, अनिल हेम्ब्रम, ईश्वर हेम्ब्रम, अर्जुन मुर्मू, पलटन मुर्मू, प्रधान मुर्मू, जितेन मरांडी, अरविंद सोरेन, आदित्य टुडू, रिंकू टुडू, बिटिया हांसदा, उज्ज्वल हेम्ब्रोम, बोबी मरांडी, जुली बेसरा, मकु टुडू, आनंद टुडू, सुनिराम सोरेन, बिनुती सोरेन, प्रवेश हेम्ब्रम और प्रियंका टुडू सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण पुरुष व महिलाएं मौजूद थे।

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