दुमका : झारक्राफ्ट की ओर से हस्तशिल्प कारीगरों के लिए स्थानीय बाजार पर आधारित दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन जोहार सभागार में किया गया। सहायक निदेशक भुवन भाष्कर ने कहा कि इसका मुख्य मकसद हस्तशिल्प से जुड़े कारीगरों को स्थानीय बाजार उपलब्ध कराना। उसके लिए कारीगर को आवश्यक सुझाव, सहयोग व मार्गदर्शन दिया जा रहा है। ताकि बाजार के बदलते मिजाज और उसकी मांग के अनुरूप उत्पाद की गुणवत्ता और डिजाइनिग को नया रूप दे सकें। सरकार की यह कोशिश रही है कि ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े कारीगरों की आय में वृद्धि हो और उनका जीवन स्तर उंचा उठ सके। इसके लिए सरकार हरसंभव सहयोग देने के लिए संकल्पित है। तकनीकी सत्र के मुख्यवक्ता सहायक निदेशक रेशम सुधीर कुमार सिंह ने कहा कि वैश्वीकरण और बाजारवाद के इस दौर में उत्पादन की प्रक्रिया ही नहीं बदली बल्कि गुणवत्ता की मांग भी बाजार में बढ़ी है, जिसको समझने की जरूरत है। किसी चीज की गुणवत्ता जितनी अधिक होगी, डिजाइनिग और पैकेजिग जितना बेहतर होगा बाजार में उसकी मांग भी उतनी अधिक होगी। जब यह सब होगा तो कारीगरों को उसका उचित मूल्य भी मिलेगा।

क्लस्टर मैनेजर शिखा आनंद के संयोजन में आयोजित कार्यशाला के तीसरे सत्र में प्रतिभागियों के बीच परिचर्चा कराई गई। बुधवार को हस्तशिल्प उत्पादन, डिजाइनिग पर भी विशेष चर्चा होगी।

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