'भारत सरकार को झारखंड के कोयले की जरूरत नहीं', गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे ने हेमंत सोरेन पर कसा तंज
सांसद निशिकांत दुबे ने हेमंत सरकार पर MMDR संशोधन विधेयक को लेकर जनता को गुमराह करने और कोयला उत्पादन में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया।

दुमका परिसदन में मीडिया से बात करते गोड्डा सांसद डॉ. निशिकांत दुबे। (जागरण)
HighLights
निशिकांत दुबे ने हेमंत सरकार पर MMDR विधेयक पर गुमराह करने का आरोप लगाया।
JPSC घोटाले में झामुमो नेता सुप्रियो भट्टाचार्य की चुप्पी पर सवाल उठाए।
SIR प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले अधिकारियों की CBI जांच की मांग की।
जागरण संवाददाता, दुमका। एमएमडीआर संशोधन विधेयक 2026 लेकर हेमंत सरकार जनता को गुमराह कर रही है। ऐसे कई राज्य हैं जहां कोयला का उत्पादन हो रहा है, पर झारखंड में इसका विरोध इसलिए हो रहा है कि ये सब चोर हैं।
यह बात गोड्डा सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने रविवार को परिसदन में मीडिया से बात करते हुए कही। सांसद ने चुनौती भरे लहजे में कहा कि झारखंड सरकार बंद कर दे अपना कोयला, भारत सरकार को उनके कोयले की कोई आवश्यकता नहीं है।
जेपीएससी और जेएससीसी में हुए घोटाले में झामुमो के वरीय नेता सुप्रियो भट्टाचार्य पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उनकी पत्नी जेपीएससी की सदस्य थी। जब उनका पीए पकड़ाया तो उन्होंने सीधे कह दिया कि रुपया तो उन तक पहुंच रहा है।
हर एक मुद्दे पर लंबा चौड़ा भाषण देने वाले सुप्रियो भट्टाचार्य आज इसलिए चुप है कि उन्हें लगता है कि अगर इस मामले को सीबीआई ने ले लिया तो वह फंस जाएंगे। निशिकांत दुबे ने कहा कि हेमंत सरकार ने पैसे लेकर भर्ती की और इसमें काफी गड़बड़ी की है।
जिसने पैसे दिए उनको उन्हें नौकरी मिली। दुमका झारखंड के उप राजधानी है। पिछले 40-45 वर्षों से सोरेन परिवार यहां के जनप्रतिनिधि रहे हैं। वे अपनी एक भी उपलब्धि बताएं जो उन्होंने इस क्षेत्र के लिए किया हो। यहां के लोग बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं।
एसआईआर में मुख्य सचिव और रांची डीसी की भूमिका की हो सीबीआई जांच
भाजपा सांसद ने हेमंत सरकार पर आरोप लगाया है कि वह एसआईआर प्रक्रिया को प्रभावित करना चाहती है। इसके लिए झारखंड के मुख्य सचिव अविनाश कुमार ने राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार को बुलाकर यह समझने का प्रयास किया है कि एसआईआर की प्रक्रिया को कैसे प्रभावित किया जा सकता है।
इस मौके पर मुख्य सचिव ने राज्य के स्कूली शिक्षा सचिव उमाशंकर सिंह और रांची के उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री भी को भी साथ रखा था।
उन्होंने भारत सरकार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी और सीबीआई से मांग की कि अविनाश कुमार, उमाशंकर सिंह और मंजूनाथ भजंत्री की भूमिका की जांच की जाए। जब तक राज्य में एसआईआर की प्रक्रिया चल रही, तब तक इन्हें राज्य से बाहर रखा जाए।
