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दुमका में बाउंड्री नहीं मिली तो रसोईया ने घरों में उगाईं सब्जियां, स्कूल के मध्याह्न भोजन को बनाया पौष्टिक

Published: Tue, 06 Oct 2026 06:59 PM (IST)

दुमका के काठीकुंड में मध्याह्न भोजन रसोईया के लिए प्रशिक्षण आयोजित हुआ, जिसमें उन्हें स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा के गुर सिखाए गए।

रसोईया ने घरों में उगाईं सब्जियां (एआई जेनरेटेड तस्वीर)

रसोईया ने घरों में उगाईं सब्जियां (एआई जेनरेटेड तस्वीर)

HighLights

  1. काठीकुंड में मध्याह्न भोजन रसोईया के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित।

  2. स्कूल में पोषण वाटिका न होने पर रसोईया ने घर सब्जियां उगाईं।

  3. बच्चों को ताजी, पौष्टिक सब्जियां मिलीं, रसोईया को भी लाभ।

संवाद सहयोगी, काठीकुंड (दुमका)। काठीकुंड प्रखंड के संकुल संसाधन केंद्र उत्क्रमित उच्च विद्यालय दलदली में संकुल अंतर्गत सभी विद्यालयों की मध्याह्न भोजन रसोईया के लिए मंगलवार को एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम का नेतृत्व उत्क्रमित उच्च विद्यालय दलदली के प्रधानाध्यापक सह संकुल सचिव पवन कुमार मिश्रा एवं संकुल साधन सेवी जयनंदन कुमार ने किया। 

प्रशिक्षण सत्र में रसोईया को मध्याह्न भोजन योजना के तहत उनके कार्य-दायित्व, स्वच्छता, खाद्य सामग्री के सुरक्षित रख-रखाव, भोजन की गुणवत्ता तथा आवश्यक सावधानियों के संबंध में जानकारी दी गई। संकुल साधन सेवी जयनंदन कुमार ने विद्यालयों में पोषण वाटिका के विकास एवं उसके नियमित रखरखाव के विभिन्न उपायों की जानकारी दी। 

चावल का सुरक्षित भंडारण किया गया 

कहा कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर विद्यालयों में बच्चों के लिए पौष्टिक एवं विविधतापूर्ण भोजन की व्यवस्था को और बेहतर बनाया जा सकता है। प्रधानाध्यापक सह संकुल सचिव पवन कुमार मिश्रा ने अपने विद्यालय में मध्याह्न भोजन व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए किए गए कुछ व्यावहारिक प्रयासों एवं उनसे प्राप्त लाभों को साझा किया। 

कहा कि ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यालयों में चावल के सुरक्षित भंडारण की समस्या अक्सर सामने आती है। बरसात के मौसम में नमी के कारण चावल में कीड़े लगना, घुन लगना, सड़ांध आना तथा चूहों से नुकसान जैसी समस्याएं आम हैं। इस समस्या के समाधान के लिए उत्क्रमित उच्च विद्यालय दलदली में विद्यालय स्तर पर तीन बड़े ड्राम की व्यवस्था कर चावल का सुरक्षित भंडारण किया गया है। 

रसोईया को अपने-अपने घरों में सब्जियां उगाने के लिए प्रेरित किया

प्रशिक्षण के दौरान विद्यालय में हरी सब्जियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए किए गए अभिनव प्रयास की भी जानकारी दी गई। विद्यालय परिसर में पोषण वाटिका विकसित करने का प्रयास भी चारदीवारी के अभाव में अपेक्षित रूप से सफल नहीं हो सका। ऐसी स्थिति में प्रधानाध्यापक पवन कुमार मिश्रा ने विद्यालय की रसोईया को अपने-अपने घरों में सब्जियां उगाने के लिए प्रेरित किया तथा विद्यालय के मध्याह्न भोजन में उनके उत्पाद को शामिल करने की पहल की। इसका सकारात्मक परिणाम सामने आया। 

विद्यालय की तीनों रसोईया ने अपने घरों में विभिन्न प्रकार की सब्जियों का उत्पादन शुरू किया, जिसमें सहजन, साग, नेनुआ, झिंगली, कटहल, कद्दू, पपीता शामिल है। इस पहल से एक ओर बच्चों को मध्याह्न भोजन में नियमित रूप से ताजी एवं पोषणयुक्त हरी सब्जियां उपलब्ध होने लगीं। 

वहीं दूसरी ओर रसोईया के लिए उनकी घरेलू उपज के उपयोग का स्थानीय माध्यम भी तैयार हो गया। इस अवसर पर विद्यालय की रसोईया मार्था मरांडी ने भी संताली भाषा में अपने अनुभवों को साझा किया।

कार्यक्रम के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि विद्यालयों में उपलब्ध स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग, पोषण वाटिका का विकास, सुरक्षित खाद्यान्न भंडारण तथा स्थानीय स्तर पर सब्जी उत्पादन को प्रोत्साहन देकर मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता एवं पोषण स्तर को और बेहतर बनाया जा सकता है।

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