यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 16, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
हेमंत सोरेन के छोटे भाई को मंत्री बनाकर झामुमो ने एक तीर से साधे कई निशाने, बड़े विभागों की जिम्मेदारी बसंत सोरेन को मिली
दुमका के विधायक बसंत सोरेन चम्पाई सोरेन के कैबिनेट में मंत्री बनाए गए हैं। बसंत झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन के ...और पढ़ें

HighLights
- पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की गैर मौजूदगी में सत्ता-संगठन के बीच समन्वय बनाने की चुनौती अहम
- संथाल परगना में झामुमो की ताकत को बरकरार रखने की पहल भी होगी तेज
राजीव, दुमका। दुमका के विधायक बसंत सोरेन चम्पाई सोरेन के कैबिनेट में मंत्री बनाए गए हैं। बसंत झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन के छोटे पुत्र और पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के अनुज हैं। दुमका में वर्ष 2019 में हुए विधानसभा चुनाव में हेमंत सोरेन दुमका और बरहेट विधानसभा सीट से चुनाव जीते थे।
इसके बाद उन्होंने दुमका सीट से इस्तीफा दे दिया था और तब हुए उपचुनाव में बसंत सोरेन जीत दर्ज कर पहली बार विधायक बने और अब मंत्री बनकर सूबे के पथ निर्माण, जल संसाधन व भवन निर्माण विभाग की जिम्मेवारी संभालेंगे।
42 वर्ष के बसंत सोरेन पर अब सत्ता के साथ संगठन को धारदार बनाए रखने की चुनौती है। फिलहाल हेमंत सोरेन की गैर मौजूदगी में झामुमो को मजबूत व एकजुट बनाए रखने के साथ अभेद दुर्ग संथाल परगना को भी बचाने की जिम्मेवारी बसंत सोरेन के कांधे पर होगी।
मंत्रिमंडल के विस्तार में संथाल परगना में फिलहाल झामुमो कोटा से दो मंत्री और कांग्रेस से भी दो मंत्री हैं। वोट बैंक के लिहाज से देखा जाए तो इन चार मंत्रियों में एक आदिवासी, दो अल्पसंख्यक और एक स्वर्ण ब्राह्मण समुदाय से आते हैं।
बसंत को मंत्री बनाकर झामुमो ने एक तीर से साधा कई निशाना
बसंत सोरेन को मंत्री बनाकर झामुमो नेतृत्व ने एक तीर से कई निशाने साधे हैं। अव्वल तो यह कि संथाल परगना में किसी भी सूरत में झामुमो अपनी राजनीतिक जमीन को एकजुट और मजबूत बनाए रखना चाहता है। इसलिए युवा बसंत सोरेन के कांधे पर जिम्मेवारी तय कर सत्ता और संगठन के बीच समन्वय बनाने की कोशिश हुई है।
साथ ही युवाओं को इस पहल से साधने की पहल हुई है। झामुमो सुप्रीमो के अस्वस्थ रहने की वजह से अब संगठन और पार्टी को ताकतवर बनाने की हर कवायद फिलहाल बसंत सोरेन के ईद-गिर्द ही घूमेगी।
बसंत सोरेन के मंत्री बनाने के पीछे एक बड़ा कारण यह भी है कि वह सरकार में रहकर पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के कार्यकाल में प्रारंभ किए गए महत्वाकांक्षी योजनाओं को धरातल पर उतारने के काम को गति दे सकेंगे।
मंशा यह भी कि झामुमो जनता से किए गए अपने वायदों को पूरा कर सके। यही वजह है कि पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के विभागों में अधिकांश बड़े विभाग बसंत सोरेन को दी गई है।
बहरहाल, बसंत सोरेन को मंत्री बनाए जाने से झामुमो नेताओं व कार्यकर्ताओं में विरोधी दलों से आगे की लड़ाई लड़ने की आस जगी है।
कार्यकर्ताओं ने भले ही खुशियों का इजहार सड़कों पर उतरकर नहीं किया, क्योंकि उनके मन में हेमंत सोरेन के साथ साजिश किए जाने व उनकी गैर मौजदूगी की पीड़ा है।
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