विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

दुमका में पहली बार होगी नारियल की खेती, पायलट प्रोजेक्ट के तहत किसानों को फ्री में बांटे जाएंगे 10000 पौधे

Published: Wed, 02 Sep 2026 06:33 PM (IST)

दुमका में किसानों की आय बढ़ाने के लिए पहली बार नारियल की खेती पायलट प्रोजेक्ट के तहत शुरू की जाएगी।

एआई द्वारा जेनरेट इमेज।

एआई द्वारा जेनरेट इमेज।

HighLights

  1. दुमका में पहली बार नारियल की खेती का पायलट प्रोजेक्ट।

  2. 10 हजार पौधे लगाए जाएंगे, किसानों को मुफ्त मिलेंगे।

  3. मिश्रित खेती और विशेषज्ञ प्रशिक्षण से आय में वृद्धि।

राजीव, दुमका। झारखंड की उपराजधानी दुमका के किसान पहली बार नारियल की खेती कर अपनी आय में अतिरिक्त वृद्धि कर सकेंगे।

इसके लिए कृषि महकमा पायलट प्रोजेक्ट के तहत ब्लू प्रिंट तैयार कर इसके जरिए 10 हजार नारियल के पौधे सभी 10 प्रखंडों में लगाने की तैयारी में जुटी है।

दरअसल नारियल की मांग, खपत और इसके केवल तटीय राज्यों की फसल मानने की बदलती धारणा को ध्यान में रखकर दुमका के उपायुक्त अभिजीत सिन्हा ने कृषि विभाग दुमका में नारियल की खेती को बढ़ावा देने का निर्देश दिया है।

उपायुक्त अभिजीत सिन्हा के मुताबिक केंद्र सरकार नारियल विकास बोर्ड का गठन कर कई अनुदानित योजनाएं चला रही है। नारियल विकास बोर्ड किसानों के लिए उन्नत किस्म के पौधों के अलावा विज्ञानी तकनीक भी उपलब्ध कराती है।

अभिजीत कहते हैं कि दुमका में नारियल की खेती को पायलट प्रोजेक्ट के तहत शुरू करने की योजना है। इसके साथ मिश्रित खेती को भी बढ़ावा मिले इसके लिए ब्लू प्रिंट तैयार किया जा रहा है जिसे इसी वित्तीय वर्ष में धरातल पर उतारा जाएगा।

पायलट प्रोजेक्ट के तहत सभी 10 प्रखंडों के किसानों को जोड़ने की तैयारी

कृषि महकमा की ओर से तैयार किए जा रहे पायलट प्रोजेक्ट में दुमका के सभी 10 प्रखंडों के किसानों को जोड़ने की योजना है। इसके लिए किसानों को चिह्नित किया जाएगा।

दुमका के जिला कृषि पदाधिकारी लव कुमार कहते हैं कि नारियल विकास बोर्ड के मिशन इंटीग्रेटेड हार्टीकल्चर डेवलपमेंट योजना से किसानों को जोड़ने के लिए विभागीय स्तर पर पत्राचार किया गया है।

Coconut Farming

जयश्री ए, डायरेक्टर, नारियल विकास बोर्ड।

उन्नत प्रभेद के पौधों के लिए नारियल विकास बोर्ड के पटना शाखा से 10 हजार पौधों की मांग की गई है। तैयार हो रही योजना के मुताबिक किसान नारियल का पौधा अपनी तालाब के मेढ़, खेत या बाड़ी में लगा सकते हैं। इसके लिए चिह्नित किसानों को 10 से लेकर 300 पौधे उपलब्ध कराया जा सकता है।

किसानों से आवेदन लेकर इन्हें योजना से जोड़ा जाएगा। पहली बार किसानों को पौधा निश्शुल्क मुहैया कराया जाएगा। लाभुक किसानों को नारियल विकास बोर्ड के विशेषज्ञ प्रशिक्षण भी देंगे।

ब्लू प्रिंट में एकल और बहुफसली खेती के मॉडल पर जोर

  • कुल क्षेत्रफल - एक एकड़ यानि 4047 वर्ग मीटर
  • पौधों के बीच दूरी - 7.5 × 7.5 मीटर
  • कुल पौधों की संख्या - 65 से 71 के बीच
  • गड्ढे का आकार - लगभग 1 × 1 × 1 मीटर
  • सिंचाई - ड्रिप प्राथमिकता
  • मुख्य फलन - किस्म के अनुसार 3 से 6 वर्ष में
  • व्यावसायिक उत्पादन - सामान्यत : पांचवें वर्ष के बाद बेहतर
  • अंतर फसल - केला, पपीता, सब्जियां, हल्दी, अदरक
  • मुख्य जोखिम - पानी की कमी, जलभराव, ठंड, कीट-रोग
  • मेढ़ पर लगने वाले पौधों की संख्या - 30- 36 पौधे या फिर 20-30 पौधे
  • मेढ़ पर लगाने का बेहतर तरीका - 200 × 200 फीट के लगभग वर्गाकार खेत
  • मुख्य बाग की पौध दूरी - 7.5 × 7.5 मीटर

यह है उन्नत प्रभेद के नारियल पौधे

चौघट आरेंज ड्राफ, कल्पश्री, कल्प ज्योति, कल्प सूर्या, कल्प स्वर्णा, कल्प हरिता, चंद्र शंकरा, केरा शंकरा, समृद्धि और कल्प श्रेष्ठ। इन प्रभेदों में तीन से चार वर्षों में उपज शुरु हो जाती है। इसमें अधिकांश प्रभेदों में न्यूनतम 112 से लेकर तकरीबन 192 नारियल का फलन होता है।

Coconut Farming 1

नारियल में अलग-अलग पुष्प क्रम अलग समय पर विकसित होते हैं। इसलिए पूरा उत्पादन एक ही समय में नहीं आता है।
व्यावहारिक बाग प्रबंधन में लगभग 45-60 दिन के अंतराल पर तुड़ाई की व्यवस्था की जा सकती है।

वर्ष में लगभग 6-8 चक्र में फल निकाले जा सकते हैं। इससे किसान को एकमुश्त के बजाय नियमित अंतराल पर नकदी प्रवाह मिलता है।

किसानों के लिए अहम है खाद और पोषण प्रबंधन

किसानों के लिए नारियल की खेती के दौरान खाद और पोषण का खास महत्व है। विकसित नारियल के पेड़ के लिए प्रति वर्ष लगभग 50 किलो जैविक खाद या 30 किलो हरी खाद 500 ग्राम नाइट्रोजन, 320 ग्राम फास्फोरस, 1,200 ग्राम पोटाश जरूरी है।

इसे वर्ष में दो हिस्सों में देना है। झारखंड में नारियल खेती की सबसे बड़ी चुनौती गर्मी के महीनों में पानी हो सकती है। इसके लिए बोरिंग, कुआं,ड्रिप सिंचाई सुविधा की व्यवस्था पहले से करने का सुझाव ब्लू प्रिंट में दिया गया है।

नारियल विकास बोर्ड नए क्षेत्रों के लिए नारियल के अधीन विस्तार योजना के तहत किसानों से आवेदन आमंत्रित करती है। इसके लिए किसान या संस्थान के पास 0.5 हेक्टेयर से लेकर अधिकतम दो हेक्टेयर तक की नई क्षेत्र में कम से कम 10 पौधा लगा सकते हैं। इसके अलावा केरा सुरक्षा बीमा योजना के तहत किसान व मजदूरों का बीमा भी करती है। इसके तहत लाभुक की मृत्यु होने पर सात लाख रुपये और दुर्घटना के दौरान दो लाख रुपये का कवर मिलता है।

-

जयश्री ए, डायरेक्टर, नारियल विकास बोर्ड, रीजनल ऑफिस पटना

नारियल की खेती कर किसान एक एकड़ भू-भाग से एक साल में औसतन दो से चार लाख रुपये की औसत कमाई कर सकते हैं। नारियल के साथ किसान केला, पपीता, हल्दी,अदरक व मौसमी सब्जियां भी उगा सकते हैं। पौधा उपलब्ध होने के साथ ही पूरी योजना को धरातल पर उतारने की पहल शुरू हो जाएगी।

-

लव कुमार, जिला कृषि पदाधिकारी, दुमका

किसानों के आय में अतिरिक्त बढ़ोत्तरी के लिए दुमका में पहली बार नारियल की खेती करने के लिए ब्लू प्रिंट तैयार किया जा रहा है। केंद्र सरकार की नारियल विकास बोर्ड की योजनाओं से किसानों को जोड़ने की पहल होगी। नारियल के साथ मिश्रित फसलों की खेती को भी बढ़ावा देने की योजना है। आने वाले दिनों में मखाना की खेती पर भी ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

-

अभिजीत सिन्हा, उपायुक्त, दुमका

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।