झारखंड के बासुकीनाथ मंदिर में साल में 4 बार होती है नवरात्र, श्रद्धालु करते हैं 10 महाविद्याओं की उपासना
बासुकीनाथ मंदिर के हवन कुंड में शारदीय नवरात्रि की पूजा कलश स्थापना के साथ शुरू हुई। यहां वर्ष में चार ...और पढ़ें
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हवनकुंड पर पूजा करते पुजारी। फोटो जागरण
HighLights
बासुकीनाथ मंदिर में शारदीय नवरात्रि पूजा कलश स्थापना से शुरू।
हवन कुंड में वर्ष में चार बार होती है नवरात्रि पूजा।
दशमहाविद्याओं की आराधना से भक्तों को मिलता है मनवांछित फल।
संवाद सहयोगी, बासुकीनाथ (दुमका)। प्रसिद्ध बाबा बासुकीनाथ मंदिर परिसर स्थित हवन कुंड में रविवार को कलश स्थापन के साथ शारदीय नवरात्र की पूजा प्रारंभ हुई।
यहां वर्ष में चार बार शारदीय, बासंतिक व आषाढ़ी सहित माघी गुप्त नवरात्र में कलश स्थापित कर आद्याशक्ति दुर्गा माता की पूजा की जाती है। मां दुर्गा की यह पूजा यज्ञकुंड में पुराने समय से हो रही है।
यूं तो बाबा नागेश बासुकीनाथ मंदिर में आदिशक्ति की पूजा-अर्चना और साधना भक्तों द्वारा वर्षभर की जाती है। यहां मां पार्वती पराम्बा भगवती नागेश्वरी के रूप में भोलेनाथ के संग विराजमान हैं। माता पार्वती भगवान बासुकीनाथ की शक्ति हैं।
कई देवियों की होती है पूजा
आदिशक्ति मां पार्वती ही भगवान बासुकीनाथ की दिव्य शक्ति के स्वरूप में मंदिर प्रांगण के विभिन्न स्थानों में दसमहाविद्या के विग्रह रूप में विराजमान हैं।
भक्तों द्वारा विभिन्न कामनाओं के लिए उनकी विशेष पूजा की जाती हैं। इनमें माता काली, माता तारा, माता षोडशी, माता भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्तिका, माता भैरवी (त्रिपुरसुंदरी), माता मातंगी, माता बगलामुखी, माता धूमावती और माता कमला महाविद्याएं कहलाती हैं।
दसमहाविद्याएं भक्तों पर प्रसन्न होने पर मनवांछित फल प्रदान करती हैं। कहते हैं पराम्बा दसमहाविद्या भक्तों को इहलौकिक और पारलौकिक सभी इच्छाओं को पूर्ण करती हैं। संसार में ऐसी कोई भी वस्तु अथवा इच्छाएं नहीं, जिन्हें ये भक्तों को न दे सके।
आदि शक्ति दसमहाविद्या अपने शरणागत भक्त को भक्ति मुक्ति प्रदान कर परम पद प्रदान करती हैं। कहते हैं कि माता काली, तारा, भुवनेश्वरी, बगला आदि की पूजा और साधना से साधकगण मारण, मोहन, वशीकरण, उच्चाटन, स्तंभन आदि का गुप्त विद्याओं का ज्ञान प्राप्त कर त्रैलोक्य विजय कर सकता है और अपना उद्धार भी कर सकता है।
रोज होती है महाविद्याओं की अराधना
शारदीय नवरात्र के दौरान बासुकीनाथ मंदिर में शिवशक्ति की आराधना और दस महाविद्याओं की उपासना नित्य की जाती है। मंगलवार को शारदीय नवरात्र के तीसरे दिन को लेकर बासुकीनाथ मंदिर में पूजा अर्चना करने के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ रही है।
बासुकीनाथ मंदिर के पुरोहित पंडित प्रेम शंकर झा व मनोज झा की माने तो मंदिर परिसर स्थित हवन कुंड में कलश स्थापना सैंकड़ों वर्षों से अनवरत जारी है।
उनके परदादा स्वर्गीय नेनालाल झा ने पूर्वजों के कथनानुसार एवं भोलेनाथ के संकेतानुसार हवन कुंड में वर्ष के चारों नवरात्रा में कलश स्थापना की जो परंपरा प्रारंभ की थी, उस परंपरा का अनवरत उनके वंशजों के द्वारा निर्वहन किया जा रहा है।
