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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 18, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

आओ हकीकत से मिलाएं, दुमका के इस गांव में नहीं जाती कार; बरसात होने पर बच्चे स्कूल जाना कर देते हैं बंद

By Rohit Kumar MandalEdited By: Aysha Sheikh
Published: Sat, 18 Nov 2023 02:33 PM (IST)

Dumka News आज हम आपको झारखंड के दुमका के ऐसे गांव के बारे में बताने जा रहे हैं जहां कार ...और पढ़ें

आओ हकीकत से मिलाएं, दुमका के इस गांव में बरसात होने पर बच्चे स्कूल जाना कर देते हैं बंद
आओ हकीकत से मिलाएं, दुमका के इस गांव में बरसात होने पर बच्चे स्कूल जाना कर देते हैं बंद

संवाद सूत्र मसलिया (दुमका)। मसलिया प्रखंड के कोलरकोंडा पंचायत में पहाड़ पर बसा है आसनपानी गांव। इस गांव तक जाने के लिए अब तक कोई सड़क का निर्माण नहीं हो सका है। ग्रामीणों ने खुद के जतन से आने-जाने की राह बना ली है।

इसकी सड़क की हालत भी इतनी जर्जर है कि इस पर सहजता से आवागमन करना सबके बस की बात नहीं है। सड़क पर सिर्फ पत्थर ही पत्थर दिखाई पड़ता है। पलन मुख्य पथ से आसनपानी गांव की दूरी करीब एक किलोमीटर है। गांव में कोई विद्यालय नहीं होने के कारण छोटे-छोटे बच्चों को इसी सड़क से पढ़ने के लिए दूसरे गांव में आना-जाना करना पड़ता है।

बरसात में बच्चे विद्यालय जाना बंद कर देते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क पक्कीकरण के लिए अब तक किसी तरह का पहल नहीं हो सका है। ग्रामीण कहते हैं गांव में आज तक कोई चार चक्का वाहन नहीं आ सका है। गांव में कुल 25 से 30 घर है जहां करीब 40 परिवार निवास करते हैं।

क्या कहते हैं ग्रामीण

आजतक पक्की सड़क नसीब नहीं हो सका है। कीचड़ युक्त व पत्थरों भरे सड़क से ही आना-जाना करना पड़ता है। इसकी वजह से ग्रामीणों को काफी परेशानी होती है। - रामलाल टुडू, ग्रामीण

गांव तक आने की सड़क इतनी खराब है कि कोई बाहरी व्यक्ति यहां आना नहीं चाहते हैं। सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों को विद्यालय जाने में होती है। - प्रकाश हेंब्रम, ग्रामीण

बरसात के सबसे ज्यादा परेशानी होती है। रोगियों को इलाज के लिए खटिया पर लाद कर ले जाना पड़ता है। सरकार का कोई ध्यान नहीं है। बुनियादी सुविधा के लिए भी गांव के ग्रामीण तरस रहे हैं। - सुरेश टुडू, ग्रामीण

आसनपानी गांव पहाड़ पर बसा है। इसकी वजह से भी इस गांव की अनदेखी की जाती है। गांव जाने का कोई सड़क नहीं है। पानी की समस्या भी बरकरार है। चाह कर भी ग्रामीणों का मदद नहीं कर पाते हैं। - उकील मुर्मू, मुखिया

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