दुमका : सूबे की समाज कल्याण मंत्री डॉ. लुईस मरांडी ने गुरुवार को दुमका में आयोजित राज्य स्तरीय माडल आंगनबाड़ी केंद्र निर्माण एवं रेप्लिकेशन कार्यशाला को बतौर मुख्य अतिथि संबांधित करते हुए कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों का प्रथम संस्कारशाला है। कहा कि जब बच्चे आंगनबाड़ी केंद्र आते हैं तो तीन वर्ष के होते हैं और उन्हें जिस सांचा में ढाला जाएगा वह वैसे ही बनेंगे। इसलिए यह जरूरी है कि आंगनबाड़ी केंद्रों का माहौल व वहां की व्यवस्था उस स्तर तक पहुंचे जहां बच्चों को बेहतर व उच्च मानक का संस्कार मिल सके। इसके लिए राज्य की 38432 आंगनबाड़ी केंद्रों की सेविका, सहायिका व नव नियुक्त पोषण सखियों को जवाबदेह बनना होगा। डॉ. लुईस ने कहा कि समाज के निर्माण में सामूहिक भागीदारी जरूरी है। इसलिए समाज के हर वर्ग के लोग भी सरकार के इस महत्ती प्रयास से जुड़ें और माडल आंगनबाड़ी केंद्र बनाने के सपने को साकार करें। कहा कि वर्तमान में राज्य के 30 आंगनबाड़ी केंद्रों को माडल बनाने की पहल की गई है लेकिन आने वाले दिनों में इस प्रयास को तेज किया जाएगा। झारखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम को आयोग की अध्यक्ष आरती कुजूर, सदस्य अनहद लाल, भूपेन साहू, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी स्वेता भारती, क्राई के सुशांतो चक्रवर्ती समेत कई लोगों ने संबोधित कर तयशुदा कार्य योजना की चर्चा की। मौके पर सीडब्ल्यूसी के अध्यक्ष मनोज कुमार साह, सदस्य सुमिता ¨सह, जेजे बोर्ड के कुमार प्रभात, सदर प्रखंड दुमका की सीडीपीओ ऋतु कुमारी, रीता बेसरा समेत बाल विकास परियोजना की सेविका-सहायिका मौजूद थी। मंच का संचालन क्रेज के कालेश्वर मंडल ने किया।

By Jagran