दुमका : झारखंड कला केंद्र में शनिवार को सत्र 2018-19 के लिए दो दिवसीय प्रायोगिक परीक्षा का आयोजन हुआ। इस वर्ष झारखंड कला केंद्र की वाíषक प्रायोगिक परीक्षा के लिए प्राचीन कला केंद्र, चंडीगढ़ विश्वविद्यालय से पंडित पन्नालाल मुखर्जी प्रायोगिक परीक्षक के रूप में नियुक्त हुए हैं। इस वर्ष 160 से अधिक छात्र-छात्राओं ने शास्त्रीय गायन, वादन व नृत्य की परीक्षा दी है। पन्नालाल ने संगीत प्रतिभाओं को देखकर संतोष जाहिर किया। खासकर बाल-छात्राओं के नृत्य प्रतिभा को देखकर उन्होंने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। नन्हीं छात्राओं ने कत्थक नृत्य के कठिन बोल-बांट को तबला संगत के साथ प्रस्तुत किया। 2018-19 के लिए सैद्धान्तिक परीक्षा दिसंबर, 2018 में ही सम्पन्न हो चुकी है। अगस्त माह तक चंडीगढ़ विश्वविद्यालय के परिणाम आने के बाद सभी छात्र-छात्राएं अपने अगले वर्ग में पुन: निबंधन कराएंगे। दुमका जिले के विभिन्न विद्यालय व महाविद्यालयों के छात्र नियमित रूप से झारखंड कला केंद्र में कुशल गुरुओं के निर्देशन में शास्त्रीय नृत्य व संगीत की बारीकियों का अध्ययन करते हैं।

परीक्षक ने छात्रों के साथ दुमका के संगीत गुरुओं की प्रशंसा की। प्राचार्य गौर कांत झा के अनुसार गत वर्षो संगीत के तीनों विधाओं में आदिवासी विद्याíथयों की तादाद काफी बढ़ी है। कई युवा आदिवासी लोक व आधुनिक संगीत के गायक, वादक व निर्माता भी भारतीय शास्त्रीय संगीत सीख कर अपने संगीत को और समृद्ध करने की सोच रखते हैं।

Posted By: Jagran

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