धनबाद, जेएनएन। वासेपुर आरा मोड़ निवासी बेलाल अंसारी हत्याकाड की सुनवाई कर रही जिला एवं सत्र न्यायाधीश 14 आलोक कुमार दुबे की अदालत ने शुक्रवार को चारों आरोपितों मुश्ताक रजा, मोहम्मद वाहिद, विक्की तथा कैलू कुरेशी उर्फ जफ र इकबाल को साक्ष्य के अभाव मे बरी कर दिया। अदालत ने अपने आदेश में अभियोजन पक्ष की नाकामी का उल्लेख करते हुए कहा है कि इस मामले में कोई भी प्रत्यक्षदर्शी गवाह नहीं है। सिर्फ शक के आधार पर व परिस्थितिजन्य साक्ष्य के आधार पर मुकदमा चलाया जा रहा था जबकि उन साक्ष्यों का आपस में कोई तारतम्य नहीं है।

अदालत द्वारा यह भी कहा गया कि गवाहों की ओर से पुलिस को दिए गए बयान को अदालत में और डेवलप कर एक अलग कहानी बनाई गई और सभी गवाहों ने अपने को अदालत में प्रत्यक्षदर्शी गवाह सिद्ध करने का प्रयास किया परंतु पुलिस को दिए गए बयान में ऐसा नहीं है। अभियुक्तों के खिलाफ गुड़िया खान द्वारा धनबाद थाना में 9 अगस्त 2010 को प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी जिसमें कहा गया था कि अभियुक्त कैलू कुरेशी, छोटू खान उर्फ परवेज खान, नईम कुरैशी, मोहम्मद विक्की, मोहम्मद वाहिद तथा मुस्ताक रजा, बिलाल अंसारी को वासेपुर आरा मोड़ स्थित उसके आवास से बुलाकर ले गए थे। रात 11 बजे तक जब वह वापस नहीं आया तो वह लोग उसे ढूंढने निकले।

उन लोगों ने अभियुक्त राजा को साइकिल से श्मशान की ओर जाते देखा वह साइकिल बेलाल की थी। 7 अगस्त 2010 को उन लोगों द्वारा बेलाल की गुमशुदगी की रिपोर्ट स्थानीय थाना में दर्ज कराई गई थी तथा 9 अगस्त 2010 को बेलाल का शव पॉलिटेक्निक कैंपस स्थित पंप हाउस नंबर दो के कुआ में बोरा में बंद मिला था। बेलाल की हत्या तेज धारदार हथियार से गला काटकर कर दी गई थी। पुलिस अनुसंधान के बाद अभियुक्तों के खिलाफ 9 नवंबर 2010 को आरोप पत्र समर्पित किया था तथा अदालत में 2 मार्च 2012 को आरोप का गठन किया गया था। अभियोजन पक्ष द्वारा कुल 8 लोगों की गवाही कराई गई थी। ट्रायल के दौरान कुछ अभियुक्तों की मृत्यु हो चुकी थी। केवल 4 लोग ही ट्रायल फेस कर रहे थे।

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप