संवाद सहयोगी, बरोरा: पानी की समस्या से त्रस्त बरोरा के ग्रामीणों का गुस्सा शुक्रवार को अंतत: फूट पड़ा। आक्रोशित ग्रामीण मुराईडीह व शताब्दी परियोजना हाजिरी घर के पास पहुंचे और वहां का काम ठप कर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में शामिल महिलाएं काफी गुस्से में थीं। प्रबंधन की ओर से लगातार समझाने का प्रयास किया गया पर कोई मानने को तैयार नहीं थे। सभी परियोजना पदाधिकारी को मौके पर बुलाने की बात तथा पानी की समस्या का समाधान की बात पर अड़े हुए थे। तीन घंटे के बाद क्षेत्रीय प्रबंधक बीएमके सिंह हाजिरी घर के समीप घर पहुंचे। ग्रामीणों के साथ वार्ता की। उन्होंने शीघ्र ही जलापूर्ति का आश्वासन दिया। आश्वासन के बाद ग्रामीण शांत हुए। इसके बाद ही परियोजना का काम चालू हो सका। ग्रामीणों का कहना था कि पिछले 10 दिनों से बरोरा में जलापूर्ति बाधित है। कई बार जानकारी देने के बाद भी प्रबंधन की ओर से कोई कदम नहीं उठाया जा रहा था। बीसीसीएल के परियोजनाओं के कारण गांव के सभी कुआं और तालाब का जलस्तर नीचे चला गया तथा सूख चुका है। इससे हमारे सामने पानी की समस्या उत्पन्न हो गई है। लोग टैंकर, बाइक, साइकिल या फिर टेंपो के माध्यम से बाहर से पानी लाने के लिए मजबूर हैं। आंदोलन में देवानंद साव, प्रदीप रवानी, बाबू गोप, राजीव बिसियार, आजाद कुम्हार, दिलीप सिंह, मनोज कुम्हार, सुनीता देवी, ललिता देवी, गंगा देवी, आशा देवी, मालती देवी आदि शामिल थी।

10 दिनों सेजलापूर्ति ठप

मुराईडीह परियोजना के खदान से बरोरा बस्ती, मंदरा, बरोरा न्यू क्वार्टर, पियोर बरोरा तथा उसके आस पास के इलाके में पिट वाटर की आपूर्ति की जाती है। जहां मोटर में तकनीकी खराबी आ जाने के कारण पिछले 10 दिनों उक्त स्थानों में जलापूर्ति ठप है। यहां के लोग इसी पानी पर निर्भर हैं।

Edited By: Jagran