जागरण संवाददाता, धनबाद : झारखंड राज्य निर्माण के बाद अधिकारी से लेकर चपरासी तक को प्रोन्नति दी गई है। परंतु प्राथमिक शिक्षकों को राज्य गठन के 20 वर्षों के बाद भी प्रोन्नति नहीं मिली। आज भी शिक्षक प्रोन्नति से वंचित हैं। किसी-किसी जिले में तो ऐसी स्थिति है की प्रोन्नति की प्रक्रिया शुरू की गई पर वहां भी आधा-अधुरा प्रोन्नति दी गई है। अभी भी अधिकांश जिले के शिक्षक आज भी प्रोन्नति से वंचित हैं। यह मामला झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा है। संघ के अध्यक्ष राजेंद्र शुक्ल ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि आरक्षण से संबंधित कमेटी ने अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को देते हुए प्रोन्नति की सिफारिस की है। 24 वर्षों के बाद प्रवरण वेतनमान शिक्षकों को देने का प्रावधान है। इसलिए एक अप्रैल 1998 से प्रोन्नति दी जाए। मध्य विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों का 95 प्रतिशत पद वर्षों से खाली है। योग्यता के बाद भी शिक्षकों को प्रोन्नति नहीं दी जा रही है। जिसका सीधा असर शिक्षा पर पड़ रहा है खाली पद रहने के कारण स्कूलों में पढ़ाई लिखाई का काम निर्बाध रूप से नहीं चल पा रहा है सातवें वेतनमान लागू होने के बाद वरीय एवं प्रवरण वेतनमान एक जनवरी 2016 को ही समाप्त हो गया है। ऐसी परिस्थिति में कोई वित्तीय लाभ प्रोन्नति के पश्चात नहीं मिल रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग करते हुए कहा कि शिक्षकों को अन्य कर्मियों की तरह एमएसीपी का लाभ दिया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार को इस पर गंभीरतापूर्वक विचार करना चाहिए, ताकि शिक्षा के उद्देश्य को पूरा किया जा सके।

Edited By: Atul Singh