हाइड्रो पाउडर से चमका रहे रसगुल्ले, चांदी की जगह नकली वर्क; धनबाद में त्योहार पर मिठास में घुल रहा जहर
धनबाद में त्योहारों पर मिठाइयों में बड़े पैमाने पर मिलावट का खुलासा हुआ है।

एआई द्वारा जेनरेट इमेज।
HighLights
95% दुकानों में रसगुल्लों में हाइड्रो पाउडर का उपयोग।
चांदी के वर्क की जगह नकली एल्युमिनियम का इस्तेमाल।
केमिकल और रंगों से पेट, लिवर को गंभीर खतरा।
जागरण संवाददाता, धनबाद। रक्षा बंधन पर जहां एक ओर शहरवासी अपने रिश्तों में मिठास घोलने के लिए मिठाइयों की जमकर खरीदारी कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अधिक मुनाफा कमाने और बिक्री बढ़ाने के फेर में ग्राहकों की सेहत के साथ बड़े पैमाने पर खिलवाड़ किया जा रहा है।
शहर के बाजारों में दूध जैसे सफेद दिखने वाले रसगुल्लों से लेकर चांदी की चमक बिखेरती काजू बर्फी जैसी मिठाइयों में मिलावट का खेल चरम पर है।
मिष्ठान कारोबारी मिठाइयों का रूप निखारने के लिए कपड़ा धोने वाले केमिकल हाइड्रो पाउडर से लेकर चांदी के वर्क की जगह सस्ते एल्युमिनियम वर्क का धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रहे हैं।
नाम न छापने की शर्त पर शहर के एक थोक मिठाई व्यापारी ने इस पूरे काले कारोबार का चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि धनबाद की लगभग 95 प्रतिश दुकानों में सफेद रसगुल्लों का रंग निखारने के लिए हाइड्रो पाउडर (केमिकल) का प्रयोग किया जा रहा है ताकि ग्राहक देखकर आकर्षित हो जाएं।
शुद्ध और प्राकृतिक तरीके से बने रसगुल्ले का रंग कभी भी एकदम दूध सा सफेद नहीं होता बल्कि वह हल्का मटमैला या हल्का पीलापन लिए होता है क्योंकि असली रसगुल्ले में चाशनी की सफाई दूध से होती है न कि किसी केमिकल से।
इसके अलावा मिठाइयों पर रंग-बिरंगी सजावट के लिए एफएसएसएआई द्वारा प्रमाणित महंगे फूड कलर की जगह मात्र 15 रुपये वाले अमानक डाइंग कलर मिलाए जा रहे हैं।
व्यापारी ने मिठाइयों पर लगने वाले चांदी के वर्क (सिल्वर फायल) का बड़ा सच उजागर करते हुए बताया कि असली चांदी का वर्क काफी महंगा होता है।
जहां 600 पीस असली चांदी के वर्क का पैकेट लगभग 2100 रुपए में आता है, वहीं मुनाफाखोर दुकानदार महज 80 में 500 पीस मिलने वाले नकली व जहरीले एल्युमिनियम वर्क का धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रहे हैं। शहर के केवल कुछ गिने-चुने ब्रांडेड और नामी दुकानदार ही असली चांदी के वर्क का उपयोग करते हैं।
कैसे पहचानें असली और नकली वर्क
व्यापारी के अनुसार, असली और नकली वर्क की पहचान बहुत आसान है। मिठाइयों पर लगा असली चांदी का वर्क हमेशा चमकता रहता है और कभी अपना रंग नहीं बदलता, जबकि नकली एल्युमिनियम वर्क लगी मिठाइयों पर दो से तीन दिनों के भीतर हल्का लालपन या कालापन आने लगता है।
केमिकल, एल्युमिनियम और सस्ते रंगों से शरीर को होने वाले गंभीर खतरे
- हाइड्रो पाउडर (सल्फाइट केमिकल) का असर: यह पेट की अंदरूनी परत को नुकसान पहुंचाता है। इसके लगातार सेवन से अल्सर, एसिडिटी, लिवर संबंधी समस्याएं और सांस के मरीजों के लिए गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।
- नकली एल्युमिनियम वर्क का जहर: एल्युमिनियम शरीर के अंदर जमा होकर पाचन तंत्र को पूरी तरह बिगाड़ देता है। लंबे समय तक एल्युमिनियम के सेवन से अल्जाइमर (भूलने की बीमारी), बोन टिश्यू डैमेज और पेट के गंभीर रोग हो सकते हैं>
- सस्ते रंगों के दुष्परिणाम: घटिया और अमानक रंगों का इस्तेमाल पेट दर्द, उल्टी, त्वचा एलर्जी और किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है।
मिठाइयों को पांच दिन ज्यादा टिकाने के लिए एंटी-फंगल केमिकल का इस्तेमाल
अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में दुकानदार फ्रीज़र के इस्तेमाल के साथ-साथ मिठाइयों में एंटी-फंगल केमिकल का धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रहे हैं।
यह केमिकल मिठाइयों को खट्टा होने से बचाता है और उनकी शेल्फ लाइफ पांच दिनों तक बढ़ा देता है। एंटी-फंगल केमिकल की बाजार में कीमत 3,600 प्रति किलो है।
बताया जा रहा है कि मिठाइयों को लंबे समय तक ताजा दिखाने के लिए एक किलो खोवा में तीन ग्राम और एक किलो छेना में 4.5 ग्राम यह केमिकल मिलाया जा रहा है।
व्यापारी इसे मिठाइयों की सुरक्षा का तरीका बता रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक बिना डॉक्टरी व वैज्ञानिक मानकों के मिठाइयों में एंटी-फंगल केमिकल का यह अत्यधिक इस्तेमाल लोगों के पेट और लिवर के लिए बेहद हानिकारक साबित हो सकता है।
मिलावटी मिठाइयां मानव शरीर के लिए बेहद खतरनाक है इन मीठाइयों के सेवन से पेट में अलसर लिवर संबंधित समस्याएं पेट दर्द उल्टी और किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है यही नहीं अगर इसका लगातार सेवन करते हैं तो आगे चलकर यह गंभीर बीमारी का रूप भी ले सकती है।
डॉ. राजीव कुमार फिजिशियन सदर अस्पताल
