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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 20, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

आपका 'दूसरा दिल' करेगा काम, कुर्सी पर करें ये आसान पुश-अप और दूर भगाएं डायबिटीज

Published: Wed, 20 Aug 2025 09:29 AM (IST)

कुर्सी पर बैठे-बैठे किया जानेवाला सोलिअस पुश-अप व्यायाम पिंडलियों की मांसपेशियों को सक्रिय करता है जिससे इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ती है ...और पढ़ें

सोलियस पुश-अप : शरीर का यह दूसरा ह्दय मधुमेह को कर रहा नियंत्रित।
सोलियस पुश-अप : शरीर का यह दूसरा ह्दय मधुमेह को कर रहा नियंत्रित।

मोहन गोप, धनबाद। आफिस कल्चर की जिंदगी में ज्यादातर लोग घंटों कुर्सी पर बैठ कर काम कर रहे हैं। काम आफिस का हो, पढ़ाई की हो या फिर टीबी और मोबाइल पर बिताया हुआ समय।

हमारी दिनचर्या लगातार बैठने की आदत से भरी हुई है। इस बैठे-बैठे जीवनशैली ने डायबिटीज, मोटापा, हृदय रोग और उच्च रक्तचाप जैसे रोगों को तेजी से बढ़ाया है। कई बार लोग कहते हैं कि व्यायाम के लिए उनके पास समय नहीं है। या फिर भारी कसरत करने की इच्छा या ताकत नहीं है।

ऐसे में मधुमेह रोग विशेषज्ञों ने हाल ही में एक बेहद आसान लेकिन बेहद असरदार व्यायाम खोजा है, जिसे सोलियस पुश-अप कहा जाता है। यह इतना सरल है कि इसे आप कुर्सी पर बैठे-बैठे ही कर सकते हैं।

इसके प्रभाव इतने बड़े हैं कि यह आपके खून में शुगर, कोलेस्ट्राल और वसा को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। अमेरिका में शोध के बाद अब भारत में भी इसका शोध जारी है।

भारत में अध्ययन का नेतृत्व मुख्य अन्वेषक और रिसर्च सोसायटी फॉर स्टडी आफ डायबिटिज इन इंडिया (आरएसएसडीआई) झारखंड चैप्टर के चेयरमैन डा. एनके सिंह कर रहे हैं।

50 प्रतिशत तक कम हो जाता सुगर का स्तर

डा. सिंह ने बताया कि हाल ही में अमेरिका और यूरोप में इसे लेकर शोध अध्ययन किए गए हैं। पाया गया कि यह व्यायाम भोजन के बाद खून में बढ़ने वाले शुगर स्तर को लगभग 50 प्रतिशत तक कम कर देता है।

इतना ही नहीं, शरीर को ग्लूकोज़ को कोशिकाओं तक पहुंचाने के लिए इंसुलिन की आवश्यकता भी लगभग 60 प्रतिशत तक घट जाती है।

इसका सीधा लाभ मधुमेह रोगियों को मिलता है, क्योंकि उनकी सबसे बड़ी समस्या भोजन के बाद रक्त शर्करा का नियंत्रण होता है।

इस व्यायाम से शरीर में फैट बर्निंग की क्षमता भी बढ़ जाती है। परिणाम यह होता है कि खून में खराब वसा यानी वीएलडीएल, ट्राइग्लिसराइड्स और एलडीएल कोलेस्ट्राल कम होते हैं और अच्छे वसा यानी एचडीएल कोलेस्ट्राल में सुधार होता है। जिससे ह्दय रोग की जोखिम कम होती है।

भारत में शोध जारी, सकारात्मक परिणाम

डा. सिंह ने बताया कि भारत में मधुमेह रोग विशेषज्ञों की टीम (आरएसएसडीआई) भी शोध कर रहा है। बहु-केंद्रित सुपरडीप अध्ययन है, जो भारत के 20 बड़े मधुमेह केंद्र (शोध अस्पताल) में चल रहा है।

यह शोध 1 जुलाई 2025 को शुरू की गई है, 30 सितंबर 2025 को पूरा होता। तीन माह में डेढ़ माह पूरे हो गए हैं। अभी तक के परिणाम काफी सकारात्मक आए हैं।

एक केंद्र पर 50-50 लोगों पर शोध हो रहे हैं। एक व्यक्ति को सोलियस पुश-अप कराया जा रहा है, जबकि दूसरे को सामान्य रखा जा रहा है। सोलियस पुश-अप वाले मरीजों में तेजी से मधुमेह पर नियंत्रण हो रहा है।

कोलेस्ट्राल भी नियंत्रित हो रही है। शोध पूरा होने के बाद 2026 में अमेरिका व भारत के सरकारी प्राप्त जर्नल में प्रकाशित होंगे। इसके बाद सरकार भी इसे लागू करेगी।

क्या है सोलियस मांसपेशी

यह हमारी पिंडली के पीछे होती है और यह पैर की गहराई में मौजूद एक अपेक्षाकृत छोटी लेकिन बेहद खास मांसपेशी है।

इसका वजन पूरे शरीर के वजन का केवल लगभग एक प्रतिशत होता है लेकिन इसका काम बहुत महत्वपूर्ण है। सामान्यत: जब हम चलते हैं या खड़े रहते हैं, तो यह मांसपेशी सक्रिय रहती है और खून को दिल तक पंप करने में मदद करती है।

यही कारण है कि सोलियस को अक्सर सेकंड हार्ट आफ द बाडी (शरीर का दूसरा ह्दय) भी कहा जाता है। शोध में पाया गया है कि अगर इस मांसपेशी को सही तरीके से सक्रिय किया जाए तो यह लंबे समय तक आक्सीडेटिव मेटाबालिज्म बनाए रख सकती है।

इसका मतलब यह है कि शरीर की कोशिकाएं लंबे समय तक ऊर्जा बनाने और खून में मौजूद ग्लूकोज तथा फैट्स को उपयोग करने में सक्षम रहती हैं।

बैठ कर दोनें पैरों को जमीन पर रखते हैं, और मांसपेशी को एंटी उठाकर उपर-नीचे किया जाता है। लगभग 10 मिनट से 30 घंटे करने हैं। एक घंटे भी किया जा सकता है।

भारतीय पुरातन चिकित्सा पद्धति में पहले से

धनबाद के योग शिक्षक मुकेश वर्मा बताते हैं कि पिंडलियों की मांसपेशी का योग में बहुत प्राचीन वर्णन है। इसे अधोमुख श्वानासन कहा जाता है। इससे शरीर में बेहतर रक्त संचार होता है।

यह कई रोगों के लिए लाभदायक होती है। पिंडली को दूसरा ह्दय भी रहा जाता है। योग में ऐसे कई विधि हैं, जो मरीजों को बताया जा रहा है। इससे इंसुलिन, वसा, बीपी नियंत्रित तो रहता है, मानसिक शांति भी प्रदान करती है।

काफ मसल्स बहुत संवेदनशीन : डा. भारती

फिजियोथेरेपिस्ट डा. चंदन भारती बताते हैं कि पिंडली की मांसपेशी बहुत संवेदनशीन होती है। इसे काफ मसल्स करते हैं। इसका एक्सरसाइड के माध्यन से स्टेचिंग कराते हैं।

यह शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को तेजी से बढ़ाता है। यह बहुत लंबे समय से एक्यूप्रेशर व फिजियो में चलाए जा रहे हैं।

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