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खेल, खिलौने और डिजिटल तकनीक से पढ़ाई बनी आसान, राष्ट्रपति से सम्मानित शिक्षिका मुनमुन ने पेश की नई मिसाल

Published: Mon, 26 Oct 2026 06:36 PM (IST)

धनबाद के राजकीयकृत मध्य विद्यालय बरमसिया में प्रभारी प्रधानाध्यापिका मुनमुन भट्टाचार्य ने पढ़ाई को रोचक बनाने के लिए कई नवाचार किए हैं।

राजकीयकृत मध्य विद्यालय बरमसिया की प्रभारी प्रधानाध्यापिका मुनमुन भट्टाचार्य को शिक्षक दिवस के अवसर पर सम्मानित करतीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु। (सौजन्यः स्वयं)

राजकीयकृत मध्य विद्यालय बरमसिया की प्रभारी प्रधानाध्यापिका मुनमुन भट्टाचार्य को शिक्षक दिवस के अवसर पर सम्मानित करतीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु। (सौजन्यः स्वयं)

HighLights

  1. प्रधानाध्यापिका मुनमुन भट्टाचार्य को शिक्षण नवाचारों हेतु राष्ट्रपति पुरस्कार।

  2. 'इंग्लिश अराउंड मी' और 'रीडिंग-बडी' से अंग्रेजी सीखना आसान।

  3. वैदिक गणित, अबेकस से बच्चों की गणना क्षमता बढ़ी।

आशीष सिंह, धनबाद। अंग्रेजी के कठिन शब्द हों या गणित के जटिल सवाल, धनबाद के राजकीयकृत मध्य विद्यालय बरमसिया में बच्चों के लिए अब इन्हें समझना पहले की तरह मुश्किल नहीं रहा।
 
यहां पढ़ाई का तरीका बदला तो विषयों को सीखना भी आसान और रोचक हो गया। रटने और कठिन अभ्यास के स्थान पर खेल, आसपास की चीजों, चित्रों और सहपाठियों के सहयोग से सीखने की पद्धति अपनाई गई।
 
इसका असर बच्चों की भाषा समझने, गणना करने और अपनी बात आत्मविश्वास से रखने की क्षमता में दिखाई देने लगा है। विद्यालय की प्रभारी प्रधानाध्यापिका मुनमुन भट्टाचार्य ने अपने इन नवाचारों से साबित किया है कि पढ़ाई को सरल बनाने के लिए महंगे संसाधनों से अधिक जरूरी बच्चों की जरूरतों के अनुरूप शिक्षण पद्धति तैयार करना है।
 
इन्हीं प्रयासों के लिए उनका चयन राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए हुआ और पांच सितंबर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उन्हें सम्मानित किया। आठवीं कक्षा तक संचालित इस विद्यालय में 500 से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं।
 
मुनमुन बताती हैं कि अंग्रेजी को बच्चों के लिए सहज बनाने के उद्देश्य से विद्यालय में  'इंग्लिश अराउंड मी' गतिविधि शुरू की गई। इसके तहत बच्चों को अपने आसपास मौजूद वस्तुओं, रोजमर्रा के अनुभवों और परिचित परिस्थितियों के माध्यम से अंग्रेजी सीखने का अवसर मिलता है।
 
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राजकीयकृत मध्य विद्यालय बरमसिया में बेकार चीजों से तैयार प्रोजेक्ट वर्क के साथ बच्चे व प्रभारी प्रधानाध्यापिका मुनमुन। (सौजन्यः स्वयं)
 
परिचित चीजों से शुरुआत होने के कारण बच्चे शब्दों के अर्थ समझने और उन्हें बोलचाल में इस्तेमाल करने में आसानी महसूस करते हैं।
 
अंग्रेजी को केवल किताब और परीक्षा तक सीमित रखने के बजाय दैनिक जीवन से जोड़ने की इस पद्धति से बच्चों को बोलने और अपनी बात व्यक्त करने का अभ्यास मिलता है।
 
वहीं, 'रीडिंग-बड़ी सिस्टम' में बड़े बच्चे छोटे सहपाठियों को पढ़ने में मदद करते हैं। चित्रों के सहारे शब्द पहचानने और साथ बैठकर पढ़ने से पठन अभ्यास सहज बनता है।
 
बच्चों को अपनी गति से सीखने और एक-दूसरे की मदद करने का अवसर मिलता है, जिससे उनमें झिझक कम करने और आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद मिलती है।

वैदिक गणित और अबेकस से सरल हुई गणना

गणित में बच्चों की रुचि बढ़ाने और गणनाओं को आसान बनाने के लिए विद्यालय में वैदिक गणित और अबेकस का अभ्यास कराया जाता है।
 
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राजकीयकृत मध्य विद्यालय बरमसिया में खेल-खेल में अंग्रेजी पढ़ातीं प्रभारी प्रधानाध्यापिका मुनमुन भट्टाचार्य। (सौजन्यः स्वयं)
 
इन विधियों के माध्यम से बच्चे संख्याओं को समझने, गणना करने और सवाल हल करने के अलग-अलग तरीके सीखते हैं। अभ्यास को रोचक बनाने से गणित के प्रति उनकी झिझक कम करने और मानसिक गणना क्षमता विकसित करने में मदद मिलती है।
 
इसका उद्देश्य केवल सवालों के उत्तर जल्दी निकालना नहीं, गणितीय प्रक्रियाओं को समझना और तार्किक ढंग से सोचने की आदत विकसित करना भी है।

डिजिटल सामग्री से लेकर स्थानीय खिलौनों तक का इस्तेमाल

पढ़ाई को बच्चों के अनुभवों से जोड़ने के लिए स्मार्टफोन, शैक्षणिक वीडियो, दीक्षा पोर्टल और ई-कंटेंट का इस्तेमाल किया जा रहा है।
 
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साउंड वाल, शब्द भंडार, बिग बुक, फ्लैश कार्ड और स्थानीय सामग्री से तैयार खिलौनों के माध्यम से विषयों को समझाने का प्रयास होता है। इससे बच्चों को पढ़ने, देखने और गतिविधियों में भाग लेने के अवसर मिलते हैं।
 
विद्यालय में बालिकाओं के लिए स्थानीय मार्शल आर्ट प्रशिक्षकों की मदद से नियमित आत्मरक्षा प्रशिक्षण भी आयोजित किया जाता है।
 
इसके साथ ही शिक्षक गृह भ्रमण कर स्कूल से दूर हो चुके या पढ़ाई छोड़ चुके बच्चों को दोबारा शिक्षा से जोड़ने का प्रयास करते हैं।