धनबाद : अब पोषक क्षेत्र के बच्चे पोषक क्षेत्र के विद्यालय या अन्यत्र कहीं भी पढ़ सकते हैं। पोषक क्षेत्र के वैसे सभी नामांकित बच्चों की संख्या ली जानी है, जो कहीं भी पढ़ाई कर रहे हैं। विद्यालय विकास योजना तैयार करने में नामांकित और अनामांकित बच्चों तथा शिक्षकों की संख्या के साथ ही विद्यालय की आधारभूत संरचनाओं, सुविधाओं की स्थिति का विश्लेषण करते हुए इसकी आवश्यकताओं को बताना है। सरकारी स्कूलों में विद्यालय विकास योजना तैयार की जाएगी। शनिवार को सभी स्कूलों को बैठक कर विद्यालय प्रबंधन समिति द्वारा विद्यालय विकास की योजना तैयार करनी है। इसमें ग्राम पंचायत विकास योजना में भी शामिल कराया जाना है।

समग्र शिक्षा अभियान के तहत वित्तीय वर्ष 22-23 के लिए यह योजना तैयार की जाएगी। शनिवार को होने वाली बैठक में स्कूलों को पानी, शौचालय, साबुन से हाथ धोने की आदत, संचालन और रख-रखाव व व्यवहार परिवर्तन और क्षमता निर्माण से संबंधित प्रश्नों का जवाब तैयार करना है। इनमें सभी शौचालय में कुंडी व कपड़े लटकाने के लिए हुक के साथ सुरक्षित दरवाजे हैं या नहीं। पीने के लिए उपलब्ध पानी की मात्रा यानी की पूरे वर्ष में प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 1.5 लीटर से अधिक, स्कूलों में शौचालय की सफाई समेत अन्य प्रश्न शामिल हैं। बच्चों को क्या-क्या सुविधाएं मिलती है। अभिभावक बच्चों की छात्रवृत्ति का पैसा पढ़ाई में खर्च करते हैं या नहीं, स्कूल में चल रहे मध्याह्न भोजन से संतुष्ट हैं, स्कूल की व्यवस्था व शिक्षकों से संतुष्ट हैं समेत अन्य बिदुओं पर आधारित प्रश्नों का जवाब देते हुए स्कूल के लिए योजना तैयार करनी है। झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद ने जारी निर्देश में कहा है कि विद्यालय प्रबंधन समिति का एक मुख्य कार्य विद्यालय विकास योजना तैयार करना है। झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद ने विद्यालय विकास योजना के लिए स्कूल से लेकर जिला तक के लिए शिड़्यूल जारी किया है। स्कूल स्तर पर 15 जनवरी, संकुल में 20 जनवरी, प्रखंड में 25 व जिला स्तर पर 30 जनवरी को विद्यालय विकास योजना का निर्माण एवं समेकन किया जाएगा। वहीं जिला स्तर पर पांच फरवरी तक अनुपालन रिपोर्ट राज्य कार्यालय को भेजें।

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