जागरण संवाददाता, धनबाद।18 सितंबर तक उच्चस्तरीय कमेटी झरिया अग्नि प्रभावित क्षेत्र के दौरे पर आएगी। धरातल पर स्थिति देखने के बाद ही आगे इस पर नीति तैयार की जाएगी। दौरे पर आने वाली टीम अग्नि प्रभावित क्षेत्र की स्थिति का जायजा लेगी। प्रभावित क्षेत्र की मौजूदा स्थिति का अध्ययन कर लोगों से जानकारी जुटा कर ही आगे की रणनीति पर काम किया जाएगा। कम समय में अधिक लोगों को डेंजर जोन से शिफ्ट करने को लेकर संशोधित मास्टर प्लान पर तैयार कर उस पर काम किया जाएगा। झरिया पुनर्वास को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय के निर्देश पर बनी उच्चस्तरीय कमेटी की मंगलवार को दिल्ली में हुई पहली बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक दिल्ली स्थित कोयला मंत्रालय में हुई, जिसकी अध्यक्षता कोयला सचिव अनिल जैन ने की।

बैठक से दूर रहे राज्य सरकार के प्रतिनिधि

इधर, बारिश के कारण राज्य सरकार के प्रतिनिधि बैठक में शामिल नहीं हो सके। बताया गया कि दौरे पर आपदा प्रबंधन, जमीन अधिग्रहण, कोल एडवाइजर व कमेटी के सदस्य सचिव आनंदजी प्रसाद, एक्सपर्ट पूर्व सीएमडी सीएमपीडीआइ शेखर शरण, आइआइटी आइएसएम के आरएम भट्टाचार्य, नीति आयोग के सदस्य के अलावा कोल इंडिया व बीसीसीएल के सीएमडी पीएम प्रसाद आएंगे। इधर, कमेटी के सदस्य व एक्सपर्ट सीएमपीडीआइ के पूर्व सीएमडी शेखर शरण ने बताया कि 1999 में 595 अग्नि प्रभावित क्षेत्र को चिह्नित किया गया था, लेकिन 40 से 50 क्षेत्र ही भू-धंसान की श्रेणी में है। अब उन क्षेत्रों को अध्ययन कर फिर से रिपोर्ट तैयार की जाएगी। अधिक डेंजर जोन वाले लोगों को पहले हटाया जाएगा। झरिया मास्टर प्लान की अवधि 11 अगस्त 2021 को समाप्त हो गई है। 12 साल में पुनर्वास की जो स्थिति है, समीक्षा के दौरान कमेटी के सदस्यों ने कई विचार दिए। 

अपनी जिम्मेवारी से भाग नहीं सकती कोल इंडिया

बैठक के दौरान कोल इंडिया चेयरमैन प्रमोद अग्रवाल ने कहा कि कोल इंडिया और बीसीसीएल अपनी जिम्मेवारी से भाग नहीं सकती। फायर को लेकर कंपनी गंभीर है। राज्य सरकार को भी विधि व्यवस्था सहित अन्य मामलों को लेकर गंभीर होना चाहिए।

Edited By: Mritunjay