शुभंकर, राजगंज: राजगंज-कतरास मार्ग स्थित कांको हिल स्कूल समीप प्लास्टिक का पाइप बनाने वाली आविष्कार पाइप एंड फिटिग नामक फैक्ट्री की वजह से कतरी नदी का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। फैक्ट्री से निकलनेवाली गंदगी के साथ बेकार की वस्तुओं को उक्त नदी के किनारे फेंक दिया जाता है। इससे नदी की पानी प्रदूषित हो रहा है। धीरे-धीरे नदी की चौड़ाई कम होती जा रही है। जानकारों का मानें तो पाइप बनाने के लिए कई प्रकार का रासायनिक पदार्थ का प्रयोग किया जाता है, जो जहरीला होता है। कतरी नदी ग्रामीणों की लाइफ लाइन है। ऐसे में जहरीले पानी के उपयोग से ग्रामीणों के गंभीर रूप से बीमार पड़ने का खतरा मंडरा रहा है।

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ग्रामीणों का आरोप

स्थानीय ग्रामीणों ने प्रबंधन के खिलाफ लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि पाइप फैक्टरी के कर्मी द्वारा प्लास्टिक की बेकार वस्तु, बोरा, कचड़ा आदि नदी तट पर फेंका जाता है। इसे नष्ट करने के उद्देश्य से जला दिया जाता है। जिसका धुआं महेशपुर से लेकर कांको तक फैलता है। प्लास्टिक के दुर्गंध से लोग परेशान हो जाते हैं। यह सिलसिला एक सप्ताह तक रहता है। सुखदेव महतो, मधु राय, सुमन तिवारी ने कहा कि कतरी नदी का एक भाग आसपास के ग्रामीण शव का अंतिम संस्कार के रूप में लाते हैं। पानी दूषित होने के कारण लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

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जिला प्रशासन मौन, विभाग के पदाधिकारी

जिला प्रशासन एवं प्रदूषण विभाग के पदाधिकारी मौन रहने के कारण फैक्ट्री प्रबंधन का मनमानी चरम पर है। कतरी नदी का दायरा छोटा होता जा रहा है। पानी में प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। खासकर बरसात के दिन में फैक्ट्री का अधिकतर गंदगी नदी में फेंक दी जाती है। पानी के तेज बहाव से यह कचड़ा बह जाता है।

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विश्वकर्मा पूजा में फैक्ट्री की सफाई की गई थी, कर्मचारियों द्वारा गलती से कचड़ा नदी में फेंक दिया गया है। इसे नदी तट से शीघ्र हटवा दिया जाएगा।

मनोज जैन, प्रबंधक

Edited By: Jagran