जागरण संवाददाता, धनबाद :

मिनी रत्न कंपनी बीसीसीएल में भूमिगत खदानों को बंद करने का सिलसिला अब भी चालू है। प्रबंधन ने 31 दिसंबर को गोविदपुर एरिया की महेशपुर भूमिगत खदान को बंद करने का प्रस्ताव तैयार किया है। नए साल में मजदूरों को इस खदान से कोयला उत्पादन करने की अनुमित नहीं मिलेगी। यह प्रस्ताव मुख्यालय प्रबंधन के प्रोजेक्ट एंड प्लानिग विभाग ने बनाया है। वहीं गोविदपुर एरिया की खरखरी भूमिगत खदान से 30 सितंबर से उत्पादन बंद है। दूसरी तरफ श्रम संगठन भी खदान बंद करने के सावल पर प्रबंधन को घेरने की तैयारी में है। जोगीडीह माइंस को लेकर मंथन : गोविदपुर एरिया के जोगीडीह भूमिगत माइंस को भी 31 मार्च को ही बंद करने का प्रस्ताव था, लेकिन श्रम संगठन व अन्य दबाव के कारण मामला रूक गया। लेकिन यहां फिलहाल 70 से 80 टन कोयला ही उत्पादन हो रहा है। उस हिसाब से इस माइंस को प्रबंधन चालू वित्तीय वर्ष के अंत तक बंद करने पर विचार कर रही है। यहां करीब 300 से ज्यादा मजदूर कार्यरत हैं। दूसरी तरफ खदान का खाटा लगातार बढ़ता ही जा रहा है। 1994 से कई मेगा माइंस हुए बंद :

बीसीसीएल की भूमिगत खदान कभी जीवन दान साबित होती थी। उच्च कोटि के कोयले का भंडार के साथ साथ कई तरह के लाभ भूमिगत कोयला उत्पादन से कंपनी को होता था। प्रदूषण बचाव के साथ-साथ कोयला की क्वालिटी को लेकर भी कभी सवाल नहीं उठता था। प्रबंधन खुली खदान पर जब से ध्यान देना शुरू किया तब से भूमिगत खदान का अस्तित्व समाप्त होता चला गया। वर्ष 1994 के बाद से कई भूमिगत खदान बंद हो गए हैं।

कोट :-

महेशपुर में करीब तीन सौ श्रमिक कार्यरत है। बंद करने को लेकर मुख्यालय से अब तक किसी तरह का कोई भी प्रस्ताव नहीं आया है। प्रस्ताव आने पर विचार किया जाएगा।

धमेंद्र मित्तल, महाप्रबंधक, गोविदपुर एरिया

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