कोमल हाथों ने 15 सालों से थामी है शावेल मशीन की कमान, धनबाद की फुलेश्वरी ने पेश की मिसाल
धनबाद की निचितपुर कोलियरी में फुलेश्वरी देवी ने शावेल मशीन ऑपरेटर बनकर मिसाल कायम की है। पति के निधन के ...और पढ़ें

मशीन चलाती कोलियरी की फुलेश्वरी देवी। (जागरण)
HighLights
फुलेश्वरी देवी निचितपुर कोलियरी में शावेल ऑपरेटर हैं।
पति के निधन के बाद संभाली परिवार की जिम्मेदारी।
पिछले 15 वर्षों से कुशलता से कर रही हैं यह काम।
अमृत बाउरी, निचितपुर। अंतरिक्ष की उड़ान हो या जोखिम भरे काम, आज दुनिया के हर पेशे में महिलाएं अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं।
घर में चूल्हा-चौकी संभालने वाली महिला के कोमल हाथ आज कोलियरी में भारी-भरकम शावेल मशीन ऑपरेट कर एक कुशल कामगार की भूमिका निभा रहे हैं। बीसीसीएल के सिजुआ क्षेत्र अंतर्गत निचितपुर कोलियरी परियोजना में कार्यरत फुलेश्वरी देवी इसका जीवंत उदाहरण हैं।
पति के असमय निधन के बाद संभाली जिम्मेदारी
बांसजोड़ा कोलियरी में काम करने वाले उनके पति बलचंद भर के असमय निधन से फुलेश्वरी पूरी तरह टूट चुकी थीं। पूरे परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई थी।
वर्ष 2001 में अपने पति की जगह उन्हें नौकरी तो मिल गई, लेकिन अधिक पढ़ी-लिखी न होने के कारण बेहतर काम मिलने में कठिनाई हो रही थी। फिर भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और शावेल मशीन चलाना सीखना शुरू किया। आज वे एक कुशल शावेल ऑपरेटर बन चुकी हैं।
उत्कृष्ट कार्य के लिए हो चुकी हैं सम्मानित
फुलेश्वरी पिछले लगभग 15 वर्षों से बिना किसी हिचक के शावेल मशीन चलाकर उत्पादन कार्य में लगी हुई हैं। उनके इस जज्बे और कार्यकुशलता को देखते हुए बीसीसीएल के वरीय अफसर उन्हें कई बार सम्मानित कर चुके हैं।
क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए फुलेश्वरी प्रेरणा की मिसाल हैं। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर उनकी यह कहानी साबित करती है कि दृढ़ इच्छाशक्ति हो तो कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती।
