अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर 'द गर्ल्स रिवेंज' डॉक्यूमेंट्री ने खींचा दुनिया का ध्यान, भारत के इस गंभीर मुद्दे को उठाया
फ्रांसीसी चैनल आरते फ्रांस की डॉक्यूमेंट्री 'द गर्ल्स रिवेंज' ने भारत और चीन में लिंगानुपात व कन्या भ्रूण हत्या जैसे ...और पढ़ें

'द गर्ल्स रिवेंज' डॉक्यूमेंट्री ने खींचा दुनिया का ध्यान। फोटो जागरण
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर फ्रांसीसी चैनल आरते फ्रांस द्वारा रिलीज की गई डॉक्यूमेंट्री 'द गर्ल्स रिवेंज' ने दुनिया का ध्यान खींचा है। डाक्यूमेंट्री में भारत और चीन में लिंगानुपात की विकृति, कन्या भ्रूण हत्या और लड़कियों के प्रति संकीर्ण सोच का मुद्दा उठाया गया है। इसमें सेल्फी विद डॉटर अभियान को भारत के सबसे प्रभावशाली सामाजिक आंदोलनों में दर्शाया गया है।
'द गर्ल्स रिवेंज' न केवल समस्या दिखाती है, बल्कि समाधान का रास्ता भी बताती है। डाक्यूमेंट्री में दिखाया गया है कि कैसे जींद के गांव बीबीपुर के सरपंच सुनील जगलान ने ग्रामीण भारत की पितृसत्तात्मक व्यवस्था को झकझोरते हुए लड़कियों को सशक्त बनाने का अभूतपूर्व अभियान चलाया।
लड़कियों की आवाज को किया मजबूत
गांव-गांव में बालिका पंचायतें गठित की, जिनके माध्यम से लड़कियां न केवल नेतृत्व सीख रही हैं, बल्कि कन्या भ्रूण हत्या को रोकने की जिम्मेदारी भी ले रही हैं। बालिका पंचायतों ने न सिर्फ लड़कियों की आवाज को मजबूत किया, बल्कि पूरे समाज की सोच में क्रांतिकारी बदलाव लाया।
वर्ष 2015 में बीबीपुर से शुरू हुआ सेल्फी विद डॉटर अभियान 70 से अधिक देशों में फैल चुका है। इसमें माता-पिता अपनी बेटियों के साथ सेल्फी लेकर इंटरनेट मीडिया पर साझा करते हैं, जिससे बेटियों के प्रति सकारात्मक नजरिया मजबूत होता है।
सामाजिक कार्यकर्ता बनकर समाज में बदलाव
चीन में भी यह अभियान जोर-शोर से अपनाया जा रहा है, जहां लोग बेटियों के प्रति प्रेम और सम्मान व्यक्त करने के लिए सेल्फी साझा कर रहे हैं। इसके अलावा फिल्म में सुनील जागलान की बेटियों नंदिनी जागलान और याचिका जागलान को केंद्रित किया गया है, जो सामाजिक कार्यकर्ता बनकर समाज में बदलाव ला रही हैं।
यह डॉक्यूमेंट्री तीन महीने पहले फ्रांस की पूरी टीम द्वारा भारत और चीन के विभिन्न स्थानों पर फिल्माई गई थी। इसमें भारत और चीन की समान सामाजिक चुनौतियों को एक साथ रखकर दिखाया गया है।
इससे पहले भी जागलान पर 'सन राइज' डाक्यूमेंट्री बनी थी, जिसे भारत के राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी मन की बात में कई बार सेल्फी विद डाटर की सराहना करते हुए इसे बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान का मजबूत हिस्सा बताया है।
