संवाद सहयोगी, कतरास: मनोज यादव हत्याकांड का मुख्य आरोपी विकास बजरंगी जमानत पर चार महीने पहले ही जेल से लौटा था। उस पर रोहित यादव पर जानलेवा हमला करने का आरोप है। इसी मामले में वह जेल गया था। इधर तब तक आकाशकिनारी में कोलियरी के बंद पड़े विभागीय और आउट सोर्सिंग पैच में अवैध उत्खनन और कोयले के कारोबार में तेजी आ गई।

कोयला सिंडिकेट से मनोज का था जुड़ाव

सूत्रों के मुताबिक अवैध कारोबार अपने चरम पर था लेकिन कोयला सिंडिकेट से मनोज का ही जुड़ाव था। इसके चलते दूसरे धंधेबाजों को कोयले के कारोबार में परेशानी हो रही थी। कोयला कोई खनन कराए पर माल सिंडिकेट को ही देना पड़ता था। ये चीज दूसरे धंधेबाजों को नागवार लग रहा था।

मनोज की बादशाहत से परेशान थे विरोधी

वह किसी दूसरे की बादशाहत नहीं चाहते थे। वहीं मनोज का आकाशकिनारी कैलुडीह में वर्चस्व था। सामाजिक कार्यों में भागीदारी के चलते किसी को सामने से विरोध करने की हिम्मत नहीं थी। इसी के चलते विरोधियों ने एकजुट होकर उसे रास्ते से हटा दिया।

इसके पहले भी बनी थी हत्या की योजना

इससे पहले भी मनोज की हत्या की योजना बनाई गई थी। 10 दिन पहले आकाशकिनारी में लोगों का जमावड़ा हुआ था। बम फट जाने से उनके मंसूबे पर पानी फिर गया था। चार बम के साथ तीन लोगों को पुलिस गिरफ्तार किया था। पुलिस ने मोलू यादव को संदेह के आधार पूछताछ की थी। हत्या के इस मामले में अधिकतर आकाशकिनारी व आस पास इलाके के लोगों का हाथ बताया जा रहा है। पुलिस की फाइल में अब तक 16 लोगों का नाम आया है। एक अज्ञात व्यक्ति की भी पुलिस तलाश कर रही है।

रांची की टीम ने लिया घटना का जायजा

रांची से पुलिस की एक विशेष टीम कतरास पहुंची। टीम घटना स्थल पर गई। उस दुकान के आसपास के लोगों से पूछताछ की, जहां अपराधियों ने गोली मार कर मनोज की हत्या की थी। दुकान संचालिका पुत्री से अपराधियों ने मनोज को बुलवाया था। पुलिस दुकान के आस पास के लोगों से तहकीकात की। आकाशकिनारी बस्ती जाकर लोगों से पूछताछ की। बंद परियोजना का मुआयना किया। पुलिस टीम का नेतृत्व संजय कुमार कर रहे थे।

Edited By: Mohit Tripathi

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