धनबाद, जेएनएन। कोरोना वायरस से संक्रमित रोगियों की जान से खिलवाड़ कर रही राज्य सरकार। यह कहना है पूर्व मंत्री व भाजपा उपाध्यक्ष अपर्णा सेनगुप्ता का। उन्होंने शनिवार को कहा कि राज्य सरकार कोरोना वायरस से सक्रमित लोगों के इलाज को लेकर गंभीर नहीं है। न ही कोरोना के फैलाव की रोकथाम में ही सरकार की कारगर भूमिका दिख रही है। अपर्णा ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री व सचिव के बीच आपसी मनमुटाव का खामियाजा राज्य की जनता भुगत रही है। इसी लड़ाई की वजह से जिस रिम्स निदेशक डॉ. डीके सिंह को सरकार ने कोरोना के दौरान पद पर बने रहने को कहा गया उन्हें स्वास्थ्य मंत्री ने विरमित करने की अनुशंसा कर दी। मंत्री अपने स्वार्थपूर्ति के लिए राज्य की जनता को गहरे संकट में झोंक रहे हैं।

निरसा विधायक अपर्णा सेनगुप्ता ने कहा कि एक तरफ जहां चिकित्सकों की कमी का रोना रोया जा रहा है। रोगियों की देखभाल को तीन दिन पर डॉक्टर आ रहे हैं, वहीं 120 चिकित्सकों के पीजी का परिणाम आने के बाद भी नियुक्ति में विलंब किया जा रहा है। क्वारंटाइन सेंटरों की व्यवस्था भगवान भरोसे है। कई लोग तो जांच कराने के दौरान कोरोना संक्रमित हो गये। इसकी पुष्टि आरोग्य सेतु एप से भी हो चुका है। बावजूद इसके स्वास्थ्य कर्मियों को पर्याप्त सुविधाएं नहीं दी जा रही है।

पूर्व मंत्री ने कहा कि राज्य की रिकवरी रेट में हालिया दिनों में भारी गिरावट आई है। जून के अंतिम सप्ताह में 75 फीसदी रही यह रेट घटकर 44 हो गयी है। राज्य सरकार धनबाद से पूरे झारखंड में कोरोना महामारी के रोकथाम के लिए सकारात्मक और प्रभावी कदम उठाए। अन्यथा भाजपा आंदोलन करेगी। सरकार विपक्ष को प्रताड़ित करने की बजाए कोरोना के रोकथाम पर ध्यान दे।

महानगर अध्यक्ष चंद्रशेखर सिंह ने कहा कि अस्पतालों में पीपीई किट, वेंटीलेटर की कमी है। सफाई ठीक से नहीं हो रही। कोरोना संक्रमित व्यक्ति यदि अन्य बीमारी से पीड़ित है तो उसके अन्य बीमारियों का इलाज नहीं हो रहा जिससे वह मृत्यु को प्राप्त हो रहा है। धनबाद में तो आलम यह है कि जिस बेड पर एक व्यक्ति की मौत हो गई उसी पर चादर बदलकर दूसरे मरीज को एडमिट कर दिया जाता है। स्वास्थ्य उपकरणों, दवाओं की खरीद में गड़बड़ी का आरोप खुद स्वास्थ्य मंत्री लगा चुके हैं।

 

Posted By: Sagar Singh

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