धनबाद, दिलीप सिन्हा। सनातन धर्म के महाग्रंथ दुर्गा सप्तशती में रक्तबीज नाम के एक दैत्य का वर्णन आता है। उसे भगवान शिव से वरदान मिला था कि उसको कोई मार नहीं सकता। उसके शरीर से रक्त की जितनी बूंदें गिरेंगी, उतने नए रक्तबीज दैत्य तैयार होंगे। तब महाकाली ने रक्त पीकर उसे मार दिया। 

माओवाद की बात करें तो गिरिडीह जिले के पारसनाथ पहाड़ जोन में कभी ऐसी ही स्थिति थी। पुलिस जितने माओवादियों को गिरफ्तार करती थी, उससे अधिक नए कैडर तैयार कर लेते थे। बावजूद अब फिजाएं बदल रही हैं। माओवादियों की ताबड़तोड़ गिरफ्तारी हो रही है। पर, अब उनको नए कैडर नहीं मिल रहे हैं। उम्मीदें बंध रहीं हैं कि जल्द यह इलाका नक्सलमुक्त होगा।

रघुवर सरकार का संकल्पः  सरकार ने पारसनाथ समेत पूरे गिरिडीह जिले को 2018 में नक्सलमुक्त करने का संकल्प लिया था। इसके लिए पुलिस एवं सीआरपीएफ जवानों ने पूरा जोर लगा दिया है। दो साल में गिरिडीह जिले में सौ से अधिक हार्डकोर माओवादी गिरफ्तार किए गए हैं। कई इलाकों में हथियारों के बड़े जखीरे भी बरामद हुए। एसपी सुरेंद्र कुमार झा एवं एएसपी ऑपरेशन दीपक कुमार के नेतृत्व में पुलिस एवं सीआरपीएफ ने माओवादियों की जड़ें हिला दी हैं। हालांकि लाख कवायदों के बाद भी पारसनाथ अभी पूरी तरह नक्सलमुक्त नहीं हो सका है। हाल में मधुबन बंद को सफल कराकर व झारखंड-बिहार बंदी के दौरान धनबाद क्षेत्र में रेल पटरी उड़ाकर माओवादियों ने अपनी सक्रियता का अहसास कराया है।

लाखों की नकदी समेत हजारों हथियारों की हो चुकी बरामदगीः दीपक कुमार ने बताया कि 2 साल में 100 से अधिक नक्सलियों की गिरफ्तारी के अलावा 44 बड़े हथियार, 4 हजार छोटे हथियार, 12 लाख रुपए लेवी की रकम, 130 आइईडी, हजार डेटोनेटर, 30 वाकी टॉकी, विस्फोटक एवं एक हजार मीटर से अधिक कॉर्डेक्स वायर बरामद किया जा चुका है। इस बरामदगी ने माओवादियों की नींव हिला दी है। आने वाले समय के लिए शुभ संकेत है। 

नक्सलियों का सफाया हमारा मकसदः गिरिडीह एसपी सुरेंद्र कुमार झा कहते हैं कि पारसनाथ समेत पूरे गिरिडीह जिले को जल्द नक्सल मुक्त कर देंगे। नक्सलियों के दिन अब लद गए हैं। उन्हें कैडर नहीं मिल रहे हैं। पुराने बचे-खुचे मावोवादी सरेंडर कर मुख्यधारा में लाैट आएं। सरकार की सरेंडर नीति का लाभ उठाएं।यदि वे ऐसा नहीं करेंगे तो मुठभेड़ में मारे जाएंगे। जाएंगे हम अपने मकसद में जल्द कामयाब होंगे। 

 

Posted By: mritunjay

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