धनबाद, जेएनएन। धरना प्रदर्शन और पत्राचार अब विरोध जताने का तरीका नहीं रह गया है। लोग इस बात को समझ चुके हैं। सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली लोगों को सामने आए, इसलिए विरोध के तरीके भी बदल गए हैं। नक्सल प्रभावित टुंडी के मनियाडीह का एक ऐसा ही मामला इस समय सोशल मीडिया पर चर्चा में है। नवीन चंद्र सिंह नामक शख्स ने मनियाडीह चरकखुर्द गांव की कच्ची सड़क की बदहाल स्थिति को बयान करते हुए लोगों का ध्यान खींचा है।

अपने सोशल मीडिया के वॉल पर नवीन ने लिखा है कि टुंडी के चरकखुर्द में समस्त जनप्रतिनिधियों एवं सरकारी पदाधिकारियों का हार्दिक स्वागत है। देश को स्वतंत्र हुए 73 वर्ष हो गए, नया कानून भी 70 वर्षों से बना हुआ है। लेकिन टुंडी मुख्यालय से महज 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित मनियाडीह थाना क्षेत्र एवं जाताखूंटी पंचायत का चरकखुर्द गांव अभी भी अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। पक्की सड़क तो छोड़िए एक कच्ची सड़क है। इस पर चलना भी दूभर हो गया है। पैदल तो इस पर चला ही जा सकता, गाड़ियां भी नहीं जा पा रही हैं।

नवीन ने आगे लिखा है कि बड़ी गाड़ी आती है तो बीच रास्ते में फंस जाती है। इस गांव में वाहनों का झुंड सिर्फ़ लोकसभा और विधानसभा चुनाव में ही देखने को मिलता है। तीन किलोमीटर लंबी यह सड़क जर्जर अवस्था को भी पार कर चुकी है। सिर्फ चरकखुर्द ही नहीं इसके आसपास के गांव कोलहरिया, डोंगाबेड़ा, मोहली टोला और कुरहवां गांव के लोग प्रभावित हो रहे हैं।

Posted By: Sagar Singh

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