जागरण संवाददाता, धनबाद : नगर निगम कार्यालय चारों ओर से हर दिन थोड़ा-थोड़ा करके टूट रहा है। पिछले माह कुछ दिन के अंतराल पर तीन बार छज्जा टूटकर गिरा। जानमाल का नुकसान तो नहीं हुआ, लेकिन खतरा बढ़ गया। अभी कुछ दिनों से लुबी सर्कुलर रोड से मनोरम नगर जाने वाले रास्ते पर हर दिन निगम कार्यालय की खिड़कियां टूटकर गिर रही हैं। एक-दो राहगीर तो इससे चोटिल भी हो गए। निगम कार्यालय का पिछला हिस्सा मनोरम नगर की ओर है। खिड़कियों के साथ ही कभी-कभी छज्जा भी टूटकर गिर जाता है। कई दफा स्थानीय लोगों ने नगर निगम के पदाधिकारियों को ध्यान भी आकृष्ट कराया। बार-बार आश्वासन ही मिला। नगर निगम झमाडा के भवन में किराए पर चला रहा है। यह पूरी तरह से जर्जर हो चुका है।

कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। जब पिछले माह छज्जा गिरा तो नगर निगम ने झमाडा को जानकारी देने के साथ ही भवन प्रमंडल के इंजीनियरिंग शाखा से संपर्क कर इसकी मरम्मत कराने की भी बात कही थी। अभी तक मरम्मत नहीं हो सका।

यही कारण है कि नगर निगम अपने इस कार्यालय को अन्यत्र शिफ्ट करने जा रहा है। जब तक कार्यालय स्थानांतरित नहीं होता, तब तक तो जानमाल का नुकसान बना ही हुआ है। मनोरम नगर के निवासी मनोज कुमार सिंह का कहना है कि यह हमारे नगर निगम का हाल है। आए दिन खिड़की का कांच टूटकर गली में गिरता रहता है। कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। कभी भी कोई खिड़की बंद नहीं रहती। जो खिड़की बंद है वह खुलती नहीं और जो खुली हुई है वह कभी बंद नहीं होती।

जर्जर हालात में 1995 का भवन

पिछले माह मुख्य गेट के सामने छज्जा गिरने की वजह से आगामी खतरे को भांपते हुए नगर आयुक्त ने यहां से निगम कार्यालय शिफ्ट करने का भी निर्णय लिया है। अभी जिस भवन में नगर निगम का कार्यालय है, निगम इसके एवज में झमाडा को प्रतिमाह तीन लाख 26 हजार रुपये किराया भुगतान करता है। यह भवन 1995 में बना था और नगर निगम यहां 2015 में शिफ्ट हुआ। इससे पहले यहां एलआइसी और आयकर विभाग का कार्यालय था।

वर्जन

झमाडा और भवन प्रमंडल को कई बार जानकारी दी गई। भवन काफी जर्जर हो चुका है। अभी तक इंजीनिययरिंग शाखा ने मरम्मत का इस्टीमेट भी बनाकर नहीं दिया। हम तो खुद कार्यालय शिफ्ट करने जा रहे हैं। टूटी खिड़कियों को दुरुस्त कराने का प्रयास किया जाएगा, लेकिन भवन काफी जर्जर हो चुका है।

- सत्येंद्र कुमार, नगर आयुक्त

Edited By: Atul Singh