जागरण संवाददाता, धनबाद: जिले में शिक्षा विभाग की हालत दयनीय है। भूगोल, बायोलॉजी, केमेस्ट्री के शिक्षक कई हाई स्कूलों में नहीं है। मैट्रिक की प्रायोगिक परीक्षा चल रही है। ऐसे में समस्या खड़ी होना स्वाभाविक है, क्योंकि बच्चों की प्रैक्टिकल परीक्षा होने के बाद कॉपी की जांच करनी है।

केवल इतना ही नहीं, 30 अप्रैल तक कॉपियों की जांच कर उसका नंबर जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय के माध्यम से झारखंड एकेडमिक काउंसिल को को भेज भी देना है। अब जिले के कई उत्क्रमित उच्च विद्यालयों तथा अन्य हाईस्कूलों में जुगाड़ शिक्षकों से मैट्रिक का प्रैक्टिकल कराया जा रहा है। उच्च विद्यालयों में कार्यरत पद से अधिक रिक्त होने के कारण काफी संख्या में उत्क्रमित हाई स्कूलों व अन्य हाईस्कूलों को आसपास के स्कूलों से विभिन्न विषयों के शिक्षकों को बुलाना पड़ रहा है। हालांकि कोरोना के कारण इस बार स्कूलों को पर्याप्त समय मिला है। इस कारण थोड़ी राहत है।

जैक के निर्देश पर 27 अप्रैल तक मैट्रिक और इंटर की प्रैक्टिकल परीक्षा लेनी है। समय मिलने के कारण सभी स्कूल अपनी सुविधा के अनुसार प्रायोगिक परीक्षा ले रहे हैं, लेकिन सबसे अधिक परेशानी उत्क्रमित उच्च विद्यालयों के समक्ष है। बताते चलें कि जिले के हाईस्कूलों में कुल स्वीकृत पद 1306 हैं। इनमें कार्यरत शिक्षकों की संख्या 612 है। रिक्ति की संख्या 694 है। कुछ ऐसी स्थिति प्लस टू स्कूलों की भी है। वहीं जिला शिक्षा पदाधिकारी प्रबला खेस ने कहा कि सभी स्कूलों से कहा कि प्रायोगिक परीक्षा के लिए यदि किसी स्कूल को शिक्षक की जरूरत है तो आसपास के स्कूलों से शिक्ष्क को बुलाकर सहयोग ले सकते हैं। विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी नहीं होगी।

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