यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 25, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
बढ़े हुए कोर्ट फीस से भड़के वकीलों ने उतारा काला कोर्ट, कहा- सरकार तत्काल वापस ले अपना फैसला
अधिवक्ताओं ने खुद को न्यायिक कार्यों से अलग रखा और काला बिल्ला लगाकर अप्रत्याशित कोर्ट फीस वृद्धि का विरोध किया। ...और पढ़ें

विधि संवाददाता, धनबाद: बार काउंसिल के आह्वान पर आज धनबाद समेत राज्य के तमाम अधिवक्ताओं ने खुद को न्यायिक कार्यों से अलग रखा और काला बिल्ला लगाकर अप्रत्याशित कोर्ट फीस वृद्धि का विरोध किया। अधिवक्ताओं के न्यायिक कार्यों से अलग रहने के कारण सिविल कोर्ट धनबाद में जहां 83 जमानत याचिकाओं पर सुनवाई नहीं हो सकी, वहीं 54 विभिन्न मामलों में गवाहों की गवाही भी नहीं हो सकी।
सोमवार को अधिवक्ता कोर्ट परिसर तो पहुंचे, लेकिन वे अपने सिरिस्ता में ही बैठे रहे। अधिवक्ताओं ने काला बिल्ला लगाकर कोर्ट फीस में बढ़ोतरी का विरोध किया। धनबाद बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अमरेंद्र सहाय ने कहा कि कोर्ट फीस में बढ़ोतरी कर सरकार जनता पर बेवजह आर्थिक बोझ बढ़ा रही है। कोर्ट फीस को पहले दोगुना और फिर अब चार गुना की वृद्धि कर दी गई है। उन्होंने कोर्ट फीस में बढ़ोतरी को तत्काल वापस लेने की मांग सरकार से की है।
कहा कि झारखंड स्टेट बार काउंसिल के आह्वान पर राज्य के करीब 25 हजार अधिवक्ता सोमवार को न्यायिक कार्य से दूर हैं। कई मुवक्किल कोर्ट परिसर पहुंचे, लेकिन अधिवक्ताओं के न्यायिक कार्य में शामिल नहीं होने के कारण वे वापस लौट गए।
दूसरी ओर बार एसोसिएशन के महासचिव जितेंद्र कुमार ने कहा कि सरकार जल्द से जल्द कोर्ट फीस में की गई बढ़ोतरी को वापस ले, अन्यथा आने वाले समय में और जोरदार आंदोलन होगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने कोर्ट फीस में जो वृद्धि की है, वह बिल्कुल अनुचित है, क्योंकि झारखंड एक पिछड़ा व गरीब राज्य है। यहां के ज्यादातर लोग गरीबी रेखा से नीचे जीवन व्यतीत कर रहे हैं। ऐसे में इस राज्य में कोर्ट फीस में अचानक 200 प्रतिशत की वृद्धि की जानी उचित नहीं है। इसका असर उन लोगों पर पड़ेगा, जिनका मुकदमा न्यायालय में चल रहा है। साथ ही अधिवक्ताओं पर भी प्रभाव पड़ेगा। कहा कि पहले पांच रुपये न्यायालय में शुल्क देना पड़ता था, अब वृद्धि के कारण 20 रुपये देना होगा। वहीं, केस की नकल निकालने में भी मुवक्किल को अधिक शुल्क देना पड़ेगा।
इसी तरह, निचली अदालतों के वकालतनामा पर कोर्ट फीस पांच से बढ़ाकर 30 रुपये कर दी गई है। निचली अदालतों के शपथ पत्र पांच रुपये की जगह 20 एवं हाईकोर्ट में यह 30 रुपये हो गया है। विवाद से संबंधित सूट फाइल करने में अब अधिकतम तीन लाख रुपये की कोर्ट फीस लगेगी। वर्तमान में यह 50 हजार रुपये ही है। इससे दीवानी के साथ फौजदारी मामलों में केस फाइल करने का खर्च काफी बढ़ गया है। सूट फाइल करने के पहले मोटी रकम की व्यवस्था करनी होगी। इसी तरह हाईकोर्ट में जनहितयाचिका दाखिल करने पर अब एक हजार रुपये लगेंगे। वर्तमान में 250 रुपये है। सामान्य आवेदन पर शुल्क 250 से 500 रुपये किया गया है। अपील एवं अदालत में रिप्रेजेंटेशन चार गुना महंगा हो गया है।
बार कांउसिल की स्टेयरिंग कमेटी के चेयरमैन राधेश्याम गोस्वामी ने कहा कि किसी भी राज्य में कोर्ट फीस में इतनी ज्यादा बढ़ोतरी नहीं की गई है। बढ़ोतरी करने से पहले राज्य सरकार को बार काउंसिल से भी बात करनी चाहिए थी। लोग न्यायालय की शरण में आते हैं, ताकि उन्हें सुलभ व सस्ता न्याय मिले। इसके विपरीत, अगर न्यायालय का शुल्क महंगा होगा तो गरीबों को न्याय कैसे मिलेगा। इस ओर राज्य सरकार को ध्यान देना चाहिए।
मौके पर बार काउंसिल के सदस्य प्रयाग महतो, धनबाद बार एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष, मेघनाथ रवानी, सहायक कोषाध्यक्ष दीपक शाह, कार्यकारिणी सदस्य अमित कुमार सिंह ,अनिल त्रिवेदी, अरविंद सिन्हा, राजन पाल, विभास महतो, हुसैन हैकल, शाहनवाज, श्रीयांस रिटोलिया, मोहम्मद रफीक, अनंत उपाध्याय, शहबाज सलाम, सुबोध कुमार, रवींद्र कुमार समेत दर्जनों अधिवक्ता उपस्थित थे।
