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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 30, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Joginder Singh Johal Death: नहीं रहे पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री दरबारा सिंह के बेटे, उनके योगदान को नहीं भूलेगा धनबाद

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Published: Sat, 30 Oct 2021 07:11 PM (IST)Updated: Sat, 30 Oct 2021 07:54 PM (IST)

Joginder Singh Johal Death पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री दरबारा सिंह के बेटे और 25 वर्ष तक लगातार गुरुनानक कालेज धनबाद ...और पढ़ें

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री दरबारा सिंह के बेटे जोगिंदर सिंह जाैहल ( फाइल फोटो)।
पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री दरबारा सिंह के बेटे जोगिंदर सिंह जाैहल ( फाइल फोटो)।

जागरण संवाददाता, धनबाद। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री दरबारा सिंह के बेटे और 25 वर्ष तक लगातार गुरुनानक कालेज के प्रधान रहे जोगिंदर सिंह जौहल का 28 अक्टूबर को चंडीगढ़ सेक्टर 25 स्थित आवास में निधन हो गया। जोगिंदर सिंह लंबे समय से बीमार चल रहे थे। धनबाद को स्काईलार्क के रूप में पहला थ्री स्टार होटल देने का श्रेय भी जोगिंदर सिंह को जाता है। इन्हीं की सरपरस्ती में धनबाद को पहला अल्पसंख्यक कालेज जीएन कालेज के तौर पर मिला। खालसा हाई स्कूल भी जोगिंदर सिंह की ही देन है। बैंक मोड़ गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान के तौर पर भी जौहल ने लंबे तक सेवा की। उनके आकस्मिक निधन पर धनबाद के बैंक मोड़ बड़ा गुरुद्वारा परिसर में शनिवार को अरदास की गई। गुरुद्वारा कमेटी के सदस्यों प्रधान तीरथ सिंह, महासचिव मनजीत सिंह, उपप्रधान जगजीत सिंह, धर्म प्रचार सचिव गुरजीत सिंह एवं राजिंदर सिंह ने अरदास कर श्रद्धांजलि दी।

राष्ट्रीयकरण के बाद होटल उद्योग में रखा कदम

धर्म प्रचार सचिव गुरजीत सिंह ने बताया कि जोगिंदर सिंह के पिता दरबारा सिंह 1980 से 1983 तक पंजाब के मुख्यमंत्री थे। पंजाब प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष और बाद में राजस्थान के राज्यपाल भी रहे। जोगिंदर सिंह जौहल के रिश्तेदार आसनसोल में रहते थे। 1957 में जोगिंदर सिंह आसनसोल आ गए। यहां कंस्ट्रक्शन का काम शुरू किया। 1967 में कुस्तौर एरिया में कोल माइंस में कदम रखा। कोयला उद्योग राष्ट्रीयकरण के बाद 1978 में होटल उद्योग में कदम रखा और धनबाद का पहला थ्री स्टार होटल स्काईलार्क के तौर पर दिया।

गुरु मान्यो ग्रंथ का हिंदी भाषा में किया प्रचार-प्रसार

गुरु मान्यो ग्रंथ को हिंदी और पंजाबी में छपवाकर पंजाबी भाषा का प्रचार-प्रसार किया। गुरु ग्रंथ साहिब जी के 300 साला शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में हुजूर साहिब नांदेड़ से यात्रा झारखंड पहुंची, इसका श्रेय भी जौहल को जाता है। पटियाला विवि के वीसी जसपाल सिंह के सहयोग से जीएन कालेज में पंजाबी सभ्याचार पर राष्ट्रीय सेमिनार कराया। इसमें बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और पंजाब से लोग पहुंचे।