धनबाद, जेएनएन। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान ट्रेनों के पहिए नहीं थमे है। मालगाड़ी के साथ-साथ 70 से 75 फीसद तक यात्री ट्रेन पटरी पर लौट गई हैं। मालगाड़ी से सामान पहुंचाने और यात्री ट्रेनों से यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचाने में 24 घंटे रेलवे कर्मचारी ड्यूटी पर लगे हैं। इस दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों में कई रेलवे कर्मचारियों की मौत हो चुकी है और सैंकड़ों रेल कर्मचारी कोरोना संक्रमित होकर जिंदगी और मौत से जंग लड़ रहे हैं। सबसे ज्यादा परेशानी ऑक्सीजन को लेकर हो रही है। ऑक्सीजन की कमी से देश के कई शहर जूझ रहे हैं। दूसरे राज्यों से ऑक्सीजन की टंकियां मंगवाई जा रही हैं। रेलवे अपने स्तर पर भी ऑक्सीजन प्लांट लगवा रही है। रेलवे हॉस्पिटल समेत अन्य इकाइयां जहां बड़ी संख्या में कर्मचारी काम करते हैं। उन जगहों पर ऑक्सीजन प्लांट लगाए जा रहे हैं।

रेलवे बोर्ड ने दिया दो करोड़ तक स्वीकृति का अधिकार

रेलव में अब तक ऑक्सीजन प्लांट के लिए महाप्रबंधकों को ₹50 लाख तक स्वीकृति देने का अधिकार था। रेल मंत्रालय ने अब इसे 4 गुना बढ़ा दिया है। यानी अब रेल महाप्रबंधक ऑक्सीजन प्लांट स्थापित करने के लिए 2 करोड़ तक की स्वीकृति दे सकते हैं। रेलवे बोर्ड के डायरेक्टर फाइनेंस (एक्सपेंडिचर) आशीष सिंह ने मंगलवार को सभी जोन को इससे जुड़ा आदेश जारी कर दिया। रेल महाप्रबंधकों को दिया गया अधिकार वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए होगा। बाद में आवश्यकतानुसार इसे बढ़ाया भी जा सकता है।

रेल यूनियनों ने किया स्वागत

रेल मंत्रालय के फैसले का रेल यूनियनों ने स्वागत किया है। ईस्ट सेंट्रल रेलवे कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष डीके पांडे और मीडिया प्रभारी एनके खवास ने कहा कि पूर्व मध्य रेल में भी बड़ी संख्या में कर्मचारी संक्रमित हैं। प्रतिदिन संक्रमित होने वाले कर्मचारियों की संख्या बढ़ रही है। कोरोना की दूसरी लहर में उन्होंने अपने कई साथियों को खो दिया है। ऑक्सीजन ना मिलने की वजह से परेशानी काफी बढ़ जाती है। ऐसे में महाप्रबंधकों को ऑक्सीजन प्लांट के लिए दिया गया अधिकार कर्मचारियों के लिए स्वागत योग्य कदम है।