बोकारो [ बीके पांडेय ]। भारतीय फौलाद का चीन भी मुरीद हो गया है। लॉकडाउन में जब चीन में इस्पात का उत्पादन बंद हो गया तो वहां के छोटे उद्योगों ने भारत की ओर देखा। बोकारो स्टील का इस्पात चीन में गुणवत्ता की कसौटी पर ऐसा खरा उतरा कि पहली बार इसका भारत से चीन को निर्यात किया गया। अप्रैल से अगस्त के बीच करीब दो लाख टन इस्पात बोकारो स्टील ने चीन भेजा है। मांग का आलम यह है कि इस वित्त वर्ष के अंत तक बोकारो स्टील का निर्यात करीब चार लाख टन तक हो जाएगा। इसके अलावा वियतनाम, नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका समेत कई और देश भी भारतीय इस्पात को भरोसेमंद मानते हैं। अब तक करीब ढाई लाख टन इस्पात विदेश जा चुका है। इस प्रदर्शन के दम पर कई साल से नुकसान में चल रही बोकारो स्टील कंपनी अब मुनाफे में आ गई है।

कुछ वक्त पहले तक चीन का इस्पात भारतीय उद्योगों के लिए चिंता का सबब था। चीनी इस्पात दुनिया में छा रहा था। टाटा स्टील के प्रबंध निदेशक टीवी नरेंद्रन ने तो इस मसले पर भारत सरकार का ध्यान भी आकृष्ट कराया था। अब बदले हालात में चीन में यहां का इस्पात पसंद किया जा रहा है। इधर घरेलू बाजार में भी इस्पात की मांग बढ़ गई है।

बोकारो स्टील के लिए लॉकडाउन अवसर बनकर आया। चीन में पूरी तरह लॉकडाउन होने पर वहां के छोटे उद्योगों से भारत से इस्पात मंगाया। भारतीय इस्पात की गुणवत्ता का असर है कि मांग लगातार बनी हुई है। चीनी कंपनियों ने बोकारो स्टील से जेआइएसजी- 3101 एसएस ग्रेड के इस्पात की खरीद की है। इसका उपयोग वाहन निर्माण, घरेलू उपकरण एवं आधारभूत संरचना के निर्माण में होता है। इसके अलावा ऑटोमोबाइल कंपनियां चेचिस बनाने के लिए सेल के सीआर क्वॉयल को भी पसंद करती हैं।

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