धनबाद :

बैंक मोड़ गुरुद्वारा परिसर जाएंगे तो आपको आत्मिक सुकून मिलेगा। गुरबाणी की गूंज आपकी रूह को ताकत देगी और अंतस को शाति। इसके अलावा यहा लोगों की स्वास्थ्य जाच कर चिकित्सा भी निश्शुल्क की जाती है। करीब 43 वर्ष से गुरुद्वारा परिसर में गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से भाई कन्हैया डिस्पेंसरी चल रही है। इसमें अब तक नौ लाख 41 हजार 700 लोगों की स्वास्थ्य जाच और इलाज हो चुका है। यदि कोई गरीब है और ज्यादा बीमार है तो विशेषज्ञ चिकित्सकों से इलाज कराने में गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी मदद करती है। भाई कन्हैया डिस्पेंसरी की शुरुआत 1975 में सरदार गुलाब सिंह ने की थी।

डिस्पेंसरी के पहले चिकित्सक डॉ. जोगिंदर सिंह और कंपाउंडर कफूर के रोगियों से मृदु व्यवहार ने डिस्पेंसरी को कुछ ही दिनों में जिले में ख्याति दिला दी। इस समय डॉ. संदीपा कौर, डॉ.रिजवान और डॉ.विजय पांडे उसी परंपरा पर चल मरीजों के इलाज में लगे हैं। सुबह और शाम दोनों वक्त यहां लोगों की स्वास्थ्य जांच कर निश्शुल्क इलाज होता है। बैंक मोड़ की रहनेवाली गुरमीत कौर कहतीं हैं कि सेवा की जो ललक यहां दिखती है यदि सभी उसे आत्मसात कर लें तो तस्वीर बदल जाएगी। समाज के इस प्रहरी ने आशा की एक किरण हम सभी को दिखाई है। सेवा पथ पर यहां के चिकित्सक मानवीय मूल्यों की बानगी बने हैं। यहां के चिकित्सकों के व्यवहार से आधा रोग यूं ही छूमंतर हो जाता है। आज डिस्पेंसरी की जिले में इसी कारण एक अलग पहचान है।

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कोट-1

सही समाज सेवा वही है, जो दीन-दुखियों के काम आए, उनका दर्द साझा करे। इसी भावना के साथ बैंक मोड़ गुरुद्वारा परिसर में भाई कन्हैया डिस्पेंसरी 43 वर्ष से समाज की शिद्दत से सेवा कर रही है। यहां हर वर्ग के लोगों की सेवा समान भाव से होती है। यहां प्रतिदिन 60 से अधिक मरीजों की जांच कर दवाइयां भी निश्शुल्क दी जाती हैं। कोई गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीज आया तो उसका विशेषज्ञ चिकित्सक से इलाज कराने में भी हम सहयोग करते हैं।

- डॉ.संदीपा कौर, चिकित्सक भाई कन्हैया डिस्पेंसरी

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कोट-2

समाज के इस प्रहरी ने लोगों को आशा की एक किरण दिखाई है और इस सेवा पथ पर कदम-कदम पर लोगों की मदद की है। जहा आज हर तरह का मजबूर व जरूरतमंद व्यक्ति एक अपनी बीमारी से छुटकारा पाने की ललक लिए आता है। भाई कन्हैया डिस्पेंसरी सभी की मदद भी करता है। यह एक सराहनीय प्रयास है। आज एक बड़ा प्रकल्प बन कर जिले में अपनी एक अलग पहचान बना चुका है।

- गुरमीत कौर, मरीज बैंक मोड़

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