धनबाद, जेएनएन। आज शनिवार, 24 जुलाई को गुरु पूर्णिमा है। आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा कहा जाता है। इस दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म भी हुआ था, इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं। धनबाद कोयलांचल में गुरु पूर्णिमा को लेकर लोगों में उत्साह है। गुरु की पूजा कर रहे हैं। अपने-अपने गुरु को याद कर रहे हैं। यह इंटरनेट मीडिया का जमाना है। ऐसे में लोग सुबह से फेसबुक, वाट्सएप और अन्य माध्यमों पर सक्रिय हैं। इंटनरेंट मीडिया के माध्यम से बधाई और शुभकामना संदेश भेज रहे हैं। राजनीतिक दल के नेता और जनप्रतिनिधि भी ट्वीट कर गुरु पूर्णिमा की बधाई दे रहे हैं। झरिया की कांग्रेस विधायक पूर्णिमा नीरज सिंह ने ट्वीट कर गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं दी हैं।

आज गुरु की पूजा करने का विशेष दिन

गुरु पूर्णिमा अपने नाम में ही सबकुछ समेटे हुए हैं। यह दिन शिष्यों के लिए खास दिन है। इस दिन से ऋतु परिवर्तन भी होता है। इसलिए इस दिन वायु की परीक्षा करके आने वाली फसलों का अनुमान भी किया जाता है। इस दिन शिष्य अपने गुरु की विशेष पूजा करता है और यथाशक्ति दक्षिणा, पुष्प, वस्त्र आदि भेंट करता है। शिष्य इस दिन अपनी सारे अवगुणों को गुरु को अर्पित कर देता है और अपना सारा भार गुरु को दे देता है। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी ने भी ट्वीट कर प्रदेशवासियों को गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं दी हैं।

गुरु नहीं तो शिव और कृष्ण की करें पूजा

हर गुरु के पीछे गुरु सत्ता के रूप में शिव जी ही हैं. इसलिए अगर गुरु न हों तो शिव जी को ही गुरु मानकर गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाना चाहिए. श्रीकृष्ण को भी गुरु मान सकते हैं. श्रीकृष्ण या शिव जी का ध्यान कमल के पुष्प पर बैठे हुये करें. मानसिक रूप से उनके पुष्प, मिष्ठान्न, और दक्षिणा अर्पित करें. स्वयं को शिष्य के रूप में स्वीकार करने की प्रार्थना करें.

किन-किन को गुरु का स्थान

आम बोलचाल की भाषा में शिक्षक को ही हम गुरु कहते और समझते हैं। लेकिन वास्तव में गुरु का अर्थ बहुत व्यापक है। ज्ञान देने वाला शिक्षक बहुत आंशिक अर्थों में गुरु होता है। जन्म जन्मान्तर के संस्कारों से मुक्त कराके जो व्यक्ति या सत्ता ईश्वर तक पहुंचा सकती हो,  ऐसी सत्ता ही गुरु हो सकती है। गुरु की प्राप्ति हो जाने के बाद प्रयास करना चाहिए कि उसके दिशा निर्देशों का यथा शक्ति पालन किया जाए। गुरु होने की तमाम शर्तें बताई गई हैं जिनमें से १३ शर्तें प्रमुख निम्न हैं-

  1. शांत
  2. दान्त
  3. कुलीन
  4. विनीत
  5. शुद्धवेषवाह
  6. शुद्धाचारी
  7. सुप्रतिष्ठित
  8. शुचिर्दक्षसुबुद्धि
  9. आश्रमी
  10. ध्याननिष्ठ
  11. तंत्र-मंत्र विशारद
  12. निग्रह-अनुग्रह

गुरु की पूजा की विधि

गुरु को उच्च आसन पर बैठाएं. उनके चरण जल से धुलायें , और पोंछे. फिर उनके चरणों में पीले या सफेद पुष्प अर्पित करें। इसके बाद उन्हें श्वेत या पीले वस्त्र दें. यथाशक्ति फल,मिष्ठान्न दक्षिणा, अर्पित करें। गुरु से अपना दायित्व स्वीकार करने की प्रार्थना करें। राजमहल के भाजपा विधायक अनंत ओझा ने झारखंड के समस्त लोगों को गुरु पूर्णिमा की बधाई देते हुए ट्वीट किया है-गुरु की महत्ता को समर्पित गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व की समस्त प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं।

     गुरु पूर्णिमा का शुभ मुर्हूत-2021 

  • पूर्णिमा तिथि आरंभ-24 जुलाई , शनिवार की सुबह 10 बजकर 43 मिनट से
  • पूर्णिमा तिथि समाप्त: 25 जुलाई 2021, रविवार की सुबह 08 बजकर 06 मिनट तक
  • गुरु पूर्णिमा पर क्या बन रहा शुभ योग
  • पूर्णिमा पर विष्कुंभ योग आरंभ-24 जुलाई 2021, शनिवार की सुबह 06 बजकर 12 मिनट तक
  • पूर्णिमा पर प्रीति योग आरंभ-25 जुलाई 2021, रविवार की सुबह 03 बजकर 16 मिनट तक
  • 25 जुलाई 2021, रविवार की सुबह 03 बजकर 16 मिनट के बाद लगेगा आयुष्मान योग

 

Edited By: Mritunjay