धनबाद, जेएनएन। ट्रेन लाश लेकर दौड़ती रही और यात्री संक्रमण फैलने के दहशत के बीच बैठे रहे। घंटों बैठे रहने के बाद भी लाश हटाने का कोई बंदोबस्त नहीं हुआ। स्टेशन आते रहे, फरियाद होती रही और ट्रेन लाश लेकर दौड़ती रही। आखिरकार जब एक यात्री ने ट्विटर पर रेल मंत्रालय को खटखटाया तब जाकर महकमे की नींद खुली और लाश को ट्रेन से नीचे उतारा गया। वाकया योग नगरी ऋषिकेश से हावड़ा जा रही दून एक्सप्रेस से जुड़ा है।

वाराणसी स्टेशन से पहले हो गई थी यात्री की माैत

ट्रेन की स्लीपर कोच एस-6 के साइड लोअर वाली सीट (17 नंबर) पर सफर कर रहे यात्री की तबीयत बेहद खराब थी। वह लगातार खांस रहा था। समय पर इलाज न मिलने से ट्रेन में ही उसकी मौत हो गई। घटना को लेकर एस-6 कोच के सभी यात्रियों में दहशत फैल गया। सभी यही मान रहे थे कि हो न हो यात्री की मौत कोरोना की वजह से ही हुई है। संक्रमण फैलने के डर से पूरी कोच में डर फैल गया था। जब घंटों ट्रेन में लाश पड़ी रही और सैकड़ों किलोमीटर का फासला गुजर गया तो जसवंत साईं गोपी नाम के शख्स ने ट्विटर पर घटना को शेयर किया। उन्होंने लिखा कि करण काल में भी रेलवे की व्यवस्था हैरान करने वाली है। ट्रेन में की यात्री की मौत हो चुकी है और उसकी लाश को हटाने का बंदोबस्त नहीं किया जा रहा है। इससे उस कोच में सफर कर रहे दूसरे यात्रियों में कोरोना फैलने का डर समा गया है।

गया स्टेशन पर उतारा गया शव

ट्वीट के बाद रेलवे हरकत में आ गई। गया स्टेशन पर शव को उतारा गया। आरपीएफ ने ट्वीट कर बताया कि दून एक्सप्रेस के गोमो पहुंचने पर वहां सब इंस्पेक्टर पी मिंज ने ट्रेन को अटेंड किया था। उस ट्रेन में शिकायतकर्ता नहीं मिले पर दूसरे यात्रियों ने बताया कि गया में आरपीएफ और डॉक्टर की मौजूदगी में लाश को उतार दिया गया है।

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